छोरी रिव्यू:अच्छा सामाजिक संदेश देती है मगर डराने में नाकामयाब

नुसरत भरुचा 'छोरी' के साथ दर्शकों को रोमांच से भरे डरावने सफर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। फिल्म में नुसरत एक गर्भवती महिला की भूमिका निभाते हुए नजर आ रहीं हैं। गर्भवती महिला के किरदार में ढलने और सेट पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए नुसरत ने फिल्म की शूटिंग शुरू करने से 25 दिन पहले प्रेग्नेंट बॉडी सूट पहनना शुरु कर दिया था।  यह फिल्म 2016 की मराठी फिल्म 'लपाछपी' का रीमेक है। 'लपाछपी' को विशाल फुरिया ने डायरेक्ट किया था औऱ 'छोरी' भी उन्होंने ही डायरेक्ट की है। 

छोरी' की कहानी काफी सिंपल सी है, जो शुरु से ही समझ में आने लगती है। साक्षी (Nusrat Bharucha) और उनके पति हेमंत पर आधारित इस फिल्म में हेमंत ने किसी से पैसे उधार ले रखे हैं। उधार लेने वाले उसके खून के प्यासे हैं और उन्हें ढूंढ रहे हैं। वहीं साक्षी प्रेग्नेंट है और इसलिए उनका ड्राइवर उन्हें एक ऐसी जगह बताता है जहां कोई नहीं आता जाता। साक्षी और हेमंत गन्नों के खेत के बीच ऐसी एकदम वीरान जगह पहुंच जाते हैं। इस जगह की अपनी एक डरावनी कहानी है। साक्षी को यहां ड्राइवर की पत्नी मिलती है, जो थोड़ी अजीब है और अपना हुकुम चलाती है। इसके साथ ही साक्षी को वहां तीन बच्चे और एक औरत भी नजर आती है। इसी बीच कहानी चलती रहती है और फिल्म कहीं-कहीं डराती है ।

नुसरत भरुचा ने फिल्म में अपने किरदार के साथ न्याय किया है। वहीं मीता वशिष्ठ का भी अच्छा काम है। कुछ मिलाकर फिल्म देखने लायक है।डायरेक्टर विशाल फुरिया हॉरर फिल्म के नाम पर ज्यादा डरा नहीं पाए, लेकिन फिल्म मजबूत सामाजिक संदेश देती है। फिल्म का डायरेक्शन ठीक-ठाक है। सिनेमाटोग्राफी भी अच्छी है। 



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