डोली में बैठकर दुर्ग में पहुँची लुटेरी सेना, आधी रात को हुआ अर्द शाका | जाने सोनार गढ़ की असली दास्ताँ

उस अंधेरी रात में हुए इस खौफनाक जंग की कहानी इतिहास के पन्नों में आज भी जैसलमेर के अर्द शाके के नाम से दर्ज है। "गढ़, दिल्ली, गढ, आगरा और गढ बीकानेर। भलो, चिणायो भाटियां, सीरगढ़, जैसलमेर"।

Vinita Kotwani
Vinita Kotwani Editor
जून 24, 2022 • 2:33 AM  0
राजस्थान
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डोली में बैठकर दुर्ग में पहुँची लुटेरी सेना, आधी रात को हुआ अर्द शाका | जाने सोनार गढ़ की असली दास्ताँ
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24 Jun 2022
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डोली में बैठकर दुर्ग में पहुँची लुटेरी सेना, आधी रात को हुआ अर्द शाका | जाने सोनार गढ़ की असली दास्ताँ
डोली में बैठकर दुर्ग में पहुँची लुटेरी सेना, आधी रात को हुआ अर्द शाका | जाने सोनार गढ़ की असली दास्ताँ

साल था। 1550 धोरों की धरती पर घाघरे के आकार में बने उस खूबसूरत किले के दरवाजे पर कुछ डोलियां पहुंची। दरवाजे पर मौजूद द्वारपालों को पहले ही बता दिया गया था कि इन डोलियों में अफगानी सरदार आमिर अली की बेगमें हैं, जो महलों में महारानियों से मिलने के लिए जा रही हैं। लेकिन तभी एक डोली में से अजीबो गरीब आवाजें सुनकर सैनिकों को कुछ संदेह होता है। जैसे ही वो तलाशी लेने के लिए डोली का पर्दा हटाते हैं तो सामने देखते हैं कि डोली में बुर्का पहने बेगमें नहीं बल्कि सैनिक बैठे थे। ये नजारा देख चारों तरफ हड़कंप मच जाता है और किले के दरवाजे पर ही युद्ध शुरू हो जाता है। जबरदस्त मारकाट मचती है। किले के राजा राव लुनकरण राजपूती वीरों के साथ खुद मैदान में उतरते हैं और जंग लड़ते हैं। उस अंधेरी रात में हुए इस खौफनाक जंग की कहानी इतिहास के पन्नों में आज भी जैसलमेर के अर्द शाके के नाम से दर्ज है। "गढ़, दिल्ली, गढ, आगरा और गढ बीकानेर। भलो, चिणायो भाटियां, सीरगढ़, जैसलमेर"। कहते है कि यों तो दिल्ली आगरा और बीकानेर के किले भी बेहद शानदार है, लेकिन भाटियों का जैसलमेर गढ़ तो इन सबका सिरमौर है। जैसलमेर के सोनार किले के तारीफ में न जाने कितने ही कसीदे पढ़े गए है। रेगिस्तान का गुलाब कहे जाने वाले इस किले को इतिहास में याद किया जाता है। ढाई साके के लिए। जी हां, इस किले में दो पूरे और एक अर्द शाका हुआ था। यानि की एक आधा साका हुआ था | अर्द शाका उस भयानक रात में हुआ। जब आमिर ने अपने शरणदाता को धोखा दे कर उस

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