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सिंध से हिंद का सफर, युवा को सिंधु संस्कृति से जोड़ने के लिये प्रयास - निखिल मेठिया
भारतीय सिंधु सभा युथ विंग और सिंधी साहित्य अकादमी द्वारा "द जर्नी ऑफ सिंधी" नामक एक अतिभव्य कार्यक्रम का आयोजन ९ अगस्त, रक्षाबंधन की शाम (शनिवार) को सरदार पटेल भवन, शाहीबाग, कर्णावती (अहमदाबाद) में किया गया।
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अगस्त 27, 2025 • 7:16 PM 0
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“सिंध से हिंद का सफर, युवा को सिंधु संस्कृति से जोड़ने के लिये प्रयास - निखिल मेठिया”
सिंध से हिंद का सफर, युवा को सिंधु संस्कृति से जोड़ने के लिये प्रयास - निखिल मेठिया
नई दिल्ली, अगस्त 27 : भारतीय सिंधु सभा युथ विंग और सिंधी साहित्य अकादमी द्वारा "द जर्नी ऑफ सिंधी" नामक एक अतिभव्य कार्यक्रम का आयोजन ९ अगस्त, रक्षाबंधन की शाम (शनिवार) को सरदार पटेल भवन, शाहीबाग, कर्णावती (अहमदाबाद) में किया गया। इस अद्भुत कार्यक्रम में सिंध के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला गया।
"सिंधी जो पहले भी अखण्ड भारत के निवासी थे, आज भी भारत के निवासी हैं।"
सिंध, जो अखण्ड भारत का अभिन्न अंग था, १४ अगस्त १९४७ को भारत की आज़ादी के समय सिंधियों को अपनी मातृभूमि छोड़नी पड़ी। उन्हें अपनी ज़मीन, जायदाद, गहने और सर्वस्व त्यागकर भारत आना पड़ा।
सशक्तिकरण(Empowerment) - युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करना व आर्थिक स्वावलंबन हेतु कौशल प्रशिक्षण
शिक्षा(Education) - सिंधी भाषा व संस्कृति के संरक्षण हेतु डिजिटल पाठ्य क्रम व छात्र वृत्ति योजनाएँ
आपातसहायता(Emergency) - समुदाय के जरूरत मंद सदस्यों हेतु आपदा प्रबंधन व चिकित्सा राहत तंत्र
पर्यावरण (Environment) - "हर सिंधी-एक वृक्ष" अभियान के माध्यम से जलवायु संरक्षण
कार्यक्रमकेअन्यप्रमुखआयाम:
इस कार्यक्रम के माध्यम से जीवन में माता-पिता के मूल्य को ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के ज़रिए अभिव्यक्त किया गया। पारिवारिक संस्कारों एवं सिंधी भाषा के महत्व को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। युवा पीढ़ी ने अपने पूर्वजों के विस्थापन के दर्द को जानकर सहमति और भावुकता व्यक्त की तथा सिंध की मातृभूमि की यादों को ताज़ा किया।
अन्य वक्ताओं के योगदान:
- पीसी स्नेहल ग्रुप के चेयरमैन चिरंजीव पटेल ने सिंधियों के मिलनसार स्वभाव की सराहना की।
- गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. भाग्येशभाई झा ने सिंधी समुदाय के साथ अपने अनुभव साझा किए।
- श्री मुकेश लखवानी ने सिंधी विरासत के संरक्षण में युवाओं की जिम्मेदारी पर जोर दिया।
- RSS के प्रांत कार्यवाह शैलेश भाई पटेल ने व्यावसायिक उपलब्धियों के माध्यम से समाज सेवा की प्रेरणा दी।
- डॉ. मायाबेन कोडनानी ने भारतीय सिंधु सभा की कार्यशैली पर प्रकाश डाला।
आज भी सिंधी चेटीचंड (ईष्टदेव झूलेलाल जयंती), थदरी, सातम-आठम जैसे त्योहारों को धूमधाम से मनाते हैं और अपनी सिंधी भाषा एवं संस्कृति को सजोए रखते हैं।
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