संविधान, प्रतिरोध और सामाजिक न्याय पर सार्थक चर्चा के साथ जयपुर एजुकेशन समिट का दूसरा दिन संपन्न

Tue, 20 Jan 2026 09:31 PM (IST)
 0
संविधान, प्रतिरोध और सामाजिक न्याय पर सार्थक चर्चा के साथ जयपुर एजुकेशन समिट का दूसरा दिन संपन्न
संविधान, प्रतिरोध और सामाजिक न्याय पर सार्थक चर्चा के साथ जयपुर एजुकेशन समिट का दूसरा दिन संपन्न

 जयपुर, 20 जनवरी 2026 : शिक्षा, समाज और लोकतांत्रिक मूल्यों पर राष्ट्रीय संवाद को गति देने वाले जयपुर एजुकेशन समिट (जेईएस) के सातवें संस्करण का दूसरा दिन विचारोत्तेजक चर्चाओं, वैचारिक टकराव और रचनात्मक संवाद के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दिनभर चले सत्रों में सत्ता, संविधान, सामाजिक न्याय और साहित्य की परिवर्तनकारी भूमिका पर गहन विमर्श हुआ। आयोजन के दौरान मुख्य आयोजक सुनील नारनौलिया सहित डॉ आंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी के  अध्यक्ष सत्यवीर सिंह, RPSC के पूर्व चेयरमेन और पूर्व विधायक हनुमान प्रसाद, आदि गणमान्य उपस्थित रहे।

आयोजन के बारे में बात करते हुए राज नारनौलिया ने बताया: “जेईएस का उद्देश्य केवल सवाल उठाना नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के आधार पर समाधान गढ़ना है ताकि शिक्षा और समाज दोनों अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और संवादशील बन सकें।”

दूसरे दिन के प्रथम सत्र “सत्ता के सामने सामाजिक संगठन: समझौता या संघर्ष” में सत्यवीर सिंह, आईएएस बी.एल. नवल और हनुमान प्रसाद ने नागरिक समाज और सत्ता के संबंधों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। वक्ताओं ने सामाजिक संगठनों की स्वायत्तता, जनहित की राजनीति और संघर्ष बनाम संवाद की रणनीतियों पर सार्थक बहस की।

इसके बाद आयोजित सत्र “प्रतिरोध करता दलित युवा: कानून विरोधी या संविधान समर्थक” में NSUI के प्रदेशाध्यक्ष विनोद जाखड़, सुमन देवठिया, राकेश जोया और रवि मेघवाल ने दलित प्रतिरोध, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रश्नों पर विचार रखा। चर्चा में यह रेखांकित किया गया कि प्रतिरोध अक्सर व्यवस्था-विरोध नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना की रक्षा का माध्यम होता है।

सत्र “कविता, कथा और क्रांति: क्या शब्द समाज बदल सकते हैं?” में राजस्थान जोधपुर और पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति रहे प्रो श्यामलाल, भंवर मेघवंशी और रतन कुमार सांभरिया ने साहित्य की सामाजिक परिवर्तनकारी शक्ति पर संवाद किया। वक्ताओं ने बताया कि कैसे कविता और कथा विमर्श को आकार देती हैं, चेतना जागृत करती हैं और समाज में वैचारिक बदलाव ला सकती हैं।

दिन के अंतिम सत्र “आंबेडकर का सपना बनाम आज का भारत: कहाँ चूक गए हम?” में पूर्व जज टेकचंद राहुल, डॉ. महेंद्र आनंद ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर के समावेशी भारत के दृष्टिकोण और वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य पर गहन आत्ममंथन किया। वक्ताओं ने समानता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कल के सत्रों की झलक:

जयपुर एजुकेशन समिट के तीसरे दिन भी कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा आयोजित की जाएगी जैसे बियॉन्ड क्रिएटिविटी: डिज़ाइनिंग करियर्स दैट ऐक्चुअली पे, फ्रॉम पॉलिसी टू प्रैक्टिस: एनईपी 2020 एंड द फ्यूचर ऑफ लर्निंग, ऑक्सीजन भी, ऑपर्च्युनिटी भी: रोज़गार के नए ग्रीन मॉडल और ब्रेकिंग इमोशनल ब्लॉकेजेज़: क्रिएटिंग अ कम्पैशनेट एंड कॉन्शस सोसाइटी।

जयपुर एजुकेशन समिट:

प्रख्यात समाजसेवी स्वर्गीय श्री लक्ष्मण राम नारनौलिया जी की स्मृति में आयोजित शिक्षा के महाकुंभ जयपुर एजुकेशन समिट (जेईएस) का 7वां संस्करण 19 से 24 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा। जेईएस ज्ञान, संवाद और नवाचार के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध एक प्रतिष्ठित मंच है, जो स्वर्गीय नारनौलिया जी की ज्ञान एवं सशक्तिकरण की विरासत को आगे बढ़ाता है। उभरते नए भारत में शिक्षा के मानकों को सुदृढ़ करने की दिशा में यह समिट एक अभूतपूर्व पहल है, जो ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब संपूर्ण विश्व शिक्षा सहित जीवन के हर क्षेत्र में परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह मंच विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया, नीति-निर्माताओं और सामाजिक चिंतकों को एक साझा मंच पर लाकर बेहतर भविष्य की दिशा में विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करता है।

Sangri Today Sangri Today is a Weekly Bilingual Newspaper and website of news and current affairs that publishes news reports from various places, from general reports to opinion, analysis and fact checks.