जयपुर पिंकफेस्ट: दूसरे दिन ‘श्रृंगार’ फैशन शो ने मचाई धूम

पिंकफेस्ट 2026 के दूसरे दिन ‘श्रृंगार’ फैशन शो में पारंपरिक और समकालीन डिजाइन का अनोखा संगम। जयपुर में सांस्कृतिक उत्सव का रंग और गहरा हुआ।

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Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026 Super Admin
February 7, 2026 • 1:48 PM  0
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जयपुर पिंकफेस्ट: दूसरे दिन ‘श्रृंगार’ फैशन शो ने मचाई धूम
पिंकफेस्ट 2026 के दूसरे दिन ‘श्रृंगार’ फैशन शो में पारंपरिक और समकालीन डिजाइन का अनोखा संगम। जयपुर में सांस्कृतिक उत्सव का रंग और गहरा हुआ।
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जयपुर पिंकफेस्ट: दूसरे दिन ‘श्रृंगार’ फैशन शो ने मचाई धूम
जयपुर पिंकफेस्ट: दूसरे दिन ‘श्रृंगार’ फैशन शो ने मचाई धूम
जयपुर, 7 फरवरी 2026 – राजस्थान की राजधानी में चल रहे जयपुर पिंकफेस्ट (India PinkFest) ने अपने दूसरे दिन कला, साहित्य और संस्कृति के प्रेमियों को एक बार फिर गहरे भावनात्मक और बौद्धिक अनुभव से जोड़ दिया। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस पांचवें संस्करण के दूसरे दिन विभिन्न पैनल चर्चाओं, पुस्तक विमोचन, नृत्य प्रदर्शनों और सांस्कृतिक सैर ने एक जीवंत माहौल रचा, जहां परंपरा और आधुनिक विचारों का सुंदर मेल देखने को मिला।

दिन की शुरुआत “AI, पुनरुद्धार का भ्रम और लुप्त होती आवाज़” सत्र से हुई, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव पर गहन विचार-विमर्श हुआ। पैनलिस्टों ने इस बात पर जोर दिया कि AI मुख्य रूप से प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और मानव व्यवहार की नकल पर आधारित है, लेकिन यह नए मौलिक विचारों का विकल्प नहीं बन सकता। आलोक शर्मा ने कहा, “AI पूरी तरह से प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और ह्यूमन मिमिक के बारे में है, यह आर्काइव्ड टेक्स्ट के रूप में दिखाने के लिए अच्छा है, लेकिन नए इनोवेटिव आइडिया के लिए नहीं।” इस सत्र में श्री प्रशांत मिश्रा, लेखक नीतीश भूषण, डॉ. रुचि दवे, प्रो. राजेश डंगोरिया और डॉ. जीतेंद्र शर्मा शामिल हुए, जबकि अनुज आहूजा ने मॉडरेशन किया। चर्चा ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि तकनीक मानवीय रचनात्मकता को कैसे प्रभावित कर रही है।

दिन का एक महत्वपूर्ण क्षण रहा ओडिसी नृत्य पर आधारित पुस्तक “ओडिसी डांस: थेराप्यूटिक्स एस्थेटिक मेटाफिजिक्स” का विमोचन। लेखिका डॉ. रीला होता की इस किताब का लॉन्च मुख्य अतिथि वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार ने किया। श्रीनिवास ने भावुक होते हुए कहा, “राजस्थान सरकार राज्य में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुझे रीला होता की इस किताब को लॉन्च करने का सौभाग्य मिला, और जब रीला इसे लिख रही थीं, तब मैं इस किताब से करीब से जुड़ा हुआ था। रस के माध्यम से योग और उसके सार की खोज।” पद्म भूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट ने लेखिका को बधाई देते हुए कहा, “भावनाओं को व्यक्त करना एक महान कला है, और उन्हें अलग-अलग मूड और भावनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करना बहुत महत्वपूर्ण है। राग और नृत्य, अपने आप में, कला का एक रूप बनाते हैं।” पैनल में डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, प्रो. माया टाक, प्रेरणा श्रीमाली और अन्य शामिल थे, जबकि अमित कल्ला ने संचालन किया।

शाम ढलते ही मंच पर नृत्य की जादुई दुनिया छा गई। आरोहिणी कथक डांस एकेडमी की प्रस्तुति “पदन्यास” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद श्री अरबिंदो सोसाइटी के डायलॉग्स हुए। दिन का समापन ‘श्रृंगार’ प्रदर्शन के साथ हुआ, जिसमें दो सौ से अधिक कॉर्पोरेट महिलाओं ने डांस, ड्रामा और संवाद के माध्यम से श्रृंगार रस के विभिन्न आयाम पेश किए। यह प्रदर्शन भारतीय पौराणिक परंपराओं और स्त्री जीवन के सोलह श्रृंगार से प्रेरित था, जो न केवल बाहरी सौंदर्य, बल्कि आंतरिक चमक, भक्ति, करुणा और शक्ति को भी उजागर करता है।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख कलाकारों में लक्ष्मी रूप श्रृंगार में आराधना पालीवाल, शिव-पार्वती गृहस्थ श्रृंगार में रजत शर्मा (शिव) और रघु श्री पोद्दार (पार्वती), राधा भक्ति श्रृंगार में सुरभि बैद, तथा महाशक्ति श्रृंगार में स्मिता संगी और दीपिका रामपुरीया शामिल रहीं। यह मंचन जयपुर की समृद्ध विरासत की एक भावपूर्ण यात्रा साबित हुआ।

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इस उत्सव को रूवी डिजिटल, कलानरी एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स, भारतीय स्टेट बैंक, FORTI, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिज़ाइन, IIS यूनिवर्सिटी, ARCH, सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी और JECRC यूनिवर्सिटी जैसे संगठनों का समर्थन प्राप्त है। आर्ट एंड डिज़ाइन प्रदर्शनी, ‘ताना-बाना’ सांस्कृतिक सैर, ‘पिकासो’ प्रदर्शनी और कविता पाठ जैसे अन्य कार्यक्रमों ने भी दिन को समृद्ध बनाया।

जयपुर पिंकफेस्ट अब तक की अपनी पांचवीं कड़ी में परंपरा और समकालीनता के बीच सेतु बनकर उभर रहा है। तीसरे दिन भी कला प्रदर्शनियां, नाट्य, नृत्य, पुस्तक विमोचन और पैनल चर्चाएं जारी रहेंगी, जो शहर के सांस्कृतिक प्रेमियों के लिए और रोमांचक अनुभव लेकर आएंगी। यह उत्सव न केवल जयपुर की गुलाबी पहचान को मजबूत करता है, बल्कि भारतीय कला-संस्कृति के भविष्य को नई दिशा देने का माध्यम भी बन रहा है।

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