नन्हे कलाकार फेस्टिवल 2025: का भव्य उद्घाटन, पहले दिन कला संगीत और संस्कृति का संगम
जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में नन्हे कलाकार फेस्टिवल 2025 का रंगारंग शुभारंभ हुआ। स्पेशली एबल्ड बच्चों के लिए फंडरेजिंग समर्पित इस उत्सव में कला, संगीत और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला।
Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026Editor
दिसंबर 26, 2025 • 12:20 AM 0
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नन्हे कलाकार फेस्टिवल 2025: का भव्य उद्घाटन, पहले दिन कला संगीत और संस्कृति का संगम
जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में नन्हे कलाकार फेस्टिवल 2025 का रंगारंग शुभारंभ हुआ। स्पेशली एबल्ड बच्चों के लिए फंडरेजिंग समर्पित इस उत्सव में कला, संगीत और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला।
Full Story: https://hindi.sangritoday.com/nanhe-kalakar-festival-2025-jaipur-opening
नन्हे कलाकार फेस्टिवल 2025: का भव्य उद्घाटन, पहले दिन कला संगीत और संस्कृति का संगम
जयपुर। गुलाबी नगरी की सर्द शामें एक बार फिर रंगों, सुरों और उत्साह से भर उठीं। होटल क्लार्क्स आमेर में 2025 के नन्हे कलाकार फेस्टिवल का भव्य उद्घाटन हुआ, जो स्पेशली एबल्ड बच्चों के लिए फंड जुटाने की एक संवेदनशील मुहिम का हिस्सा है। अभ्युत्थानम वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव का थीम ‘हम सबका फेस्टिवल’ पूरी तरह सार्थक होता नजर आया।
फेस्टिवल की शुरुआत हुई पचरंगा परेड से – एक जीवंत जुलूस जो राजस्थानी लोक संस्कृति को जीवंत रूप देता हुआ पूरे परिसर में फैल गया। यह परेड केवल मनोरंजन नहीं थी, बल्कि समावेशिता, विविधता और एकजुटता का मजबूत संदेश भी लेकर आई। मुख्य अतिथि युवा मामलात एवं खेल विभाग के शासन सचिव नीरज के पवन ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा, “नन्हे कलाकार फेस्टिवल का उद्देश्य कला और समाज को जोड़ना है। पहले दिन का उत्साह और लोगों की भागीदारी हमारे विज़न को मजबूती देती है कि कला हर उम्र के लोगों को जोड़ने का सबसे सुंदर माध्यम है।”
फेस्टिवल आयोजक एवं अभ्युत्थानम वेलफेयर सोसाइटी की डायरेक्टर रिद्धि चंद्रावत ने बताया, “यह फेस्टिवल सिर्फ उत्सव नहीं है। इसके माध्यम से हम स्पेशली एबल्ड बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए संसाधन जुटा रहे हैं। कला और संगीत के जरिए समाज को जोड़ना और संवेदना जगाना हमारा मुख्य लक्ष्य है।”
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पहले दिन का कार्यक्रम संगीत और मनोरंजन से भरपूर रहा। मंदीप और हर्ष के बैंड कुर्जल ने जेमिंग सेशन पेश कर दर्शकों को सुरों की लहर में बहा दिया। इसके बाद कोगता फाउंडेशन के ‘ग्लोबल हेल्थ हैप्पीनेस फेस्टिवल’ के सहयोग से जयपुर की पहली बेबी रेव आयोजित हुई। ‘एक्ट टू एक्शन’ संस्था द्वारा क्यूरेट इस रंगारंग पार्टी में नन्हे बच्चे, माता-पिता और दादा-दादी तक सभी थिरकते नजर आए।
शाम ढलते-ढलते मंच पर छा गया कबीर कैफे। ‘मत कर माया का अहंकार’, ‘क्या लेके आया है’ और ‘दो दिन का है मेला’ जैसे गीतों ने कबीर के दोहों को आधुनिक धुनों में पिरोकर दर्शकों के दिलों को छू लिया।
रात का आकर्षण रहा टेक्सटाइल वॉक। राजस्थान की समृद्ध वस्त्र परंपरा को एआई और आधुनिक तकनीक के साथ नया रूप दिया गया। पारंपरिक हस्तशिल्प और समकालीन डिजाइन का यह संयोजन दर्शकों के लिए एक यादगार दृश्य अनुभव बन गया। इस वॉक के पार्टनर रहे राजस्थान फैशन फेस्ट, स्टाइलिंग पार्टनर किलर जींस तथा सैलून पार्टनर स्टाइल अ क्रेज़।
दिन का समापन हुआ देश के मशहूर इंडियन ओशन बैंड की धमाकेदार प्रस्तुति से। राहुल राम की आवाज में ‘तू किसी रेल सी गुजरती है’, ‘मन कस्तूरी’ और ‘बंदे’ जैसे गाने गूंजते रहे। रॉक और लोक संगीत का यह अनोखा मिश्रण देर रात तक दर्शकों को झूमने पर मजबूर करता रहा।
फेस्टिवल में दो दिनों तक 20 से अधिक आर्ट वर्कशॉप्स, क्रिएटिव गतिविधियां तथा 80 से ज्यादा फूड, आर्ट और मर्चेंडाइज स्टॉल लगे हैं, जो हर उम्र के आगंतुकों को आकर्षित कर रहे हैं।
पहला दिन जिस उत्साह के साथ समाप्त हुआ, उसने दूसरे दिन की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। दूसरे दिन दिग्पाल की राजस्थानी फोक जेमिंग, राहगीर की भावपूर्ण प्रस्तुति, रनमल जैन की कविता पाठ, दिग्विजय सिंह जसाना के साथ फोक रेव और ग्रैंड फिनाले में सोना मोहापात्रा का लाइव कॉन्सर्ट दर्शकों का मन मोह लेगा। दिन भर चलने वाली वर्कशॉप्स और फैमिली जोन इसे हर पीढ़ी के लिए यादगार बनाएंगे।
अभ्युत्थानम वेलफेयर फाउंडेशन 2014 से जयपुर में सक्रिय एक पंजीकृत एनजीओ है। शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में काम करने वाली यह संस्था ‘स्कूल भरो आंदोलन’ से हर साल लाखों बच्चों तक शिक्षा पहुंचाती है। कोविड काल में 80,000 से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध कराया और मियावाकी तकनीक से नौ शहरी जंगल विकसित किए हैं।
नन्हे कलाकार फेस्टिवल जयपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ रहा है – जहां कला न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग के लिए उम्मीद की किरण भी बनती है।
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