नवाचार युक्त क्वालिटी रिसर्च पर ध्यान देने की आवश्यकता- डॉ राठौड़

नवाचार युक्त क्वालिटी रिसर्च पर ध्यान देने की आवश्यकता- डॉ राठौड़

उदयपुर 27 अप्रैल महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति सचिवालय में माननीय कुलपति डॉ महेंद्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में स्नातकोत्तर अनुसंधान परिणामों में सुधार को लेकर एक बैठक का आयोजन किया गयाl विश्वविद्यालय के निदेशक रेजिडेंट इंस्ट्रक्शन (DRI) डॉ.महेश कोठारी द्वारा इस बैठक का आयोजन किया गया जिसमें विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर एवं पीएच डी स्तर पर विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे हैं अनुसंधान कार्य के  आंकलन, शोध की क्वालिटी एवं उसने संभावित नवाचारों को लेकर सभी महाविद्यालय के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्षों एवं रिसर्च सुपरवाइजर के लिए इस बैठक का आयोजन किया गया थाl  

बैठक के प्रारंभ में डीआरआई डॉक्टर महेश कोठारी ने एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्र अनुसंधान कार्यों में प्रभावी रिसर्च गाइडेंस, एडवाइजर की भूमिका, विद्यार्थियों के पूर्व में किए गए अनुसंधान बैकग्राउंड और विभाग की प्रथमिकताओं को देखते हुए शोध के विषय का चयन, अनुसंधान कार्य के सिनॉप्सिस निर्माण से सबमिशन तक टाइम लाइन के पालन, शोध संपादन, शोध ग्रंथ के विभिन्न आयामों का निरीक्षण, शोध ग्रंथ का लेखन, आंकलन, संबंधित रिव्यू पेपर्स एवं संदर्भ पत्रों के उल्लेख, सेरा पर सर्च किये जाने वाले संदर्भो के साथ-साथ शोध ग्रंथ में किए जाने वाली सामान्य गलतियों के सुधार, प्लेगेरिज्म की जांच एवं शोध पर आधारित उच्च स्तरीय शोध पत्रों के  प्रकाशन पर विशेष ध्यान देने के बिंदुओं पर चर्चा की गयीI

माननीय कुलपति डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़ ने विषय की विवेचना करते हुए कहा कि हमें अप्लाइड एवं बेसिक रिसर्च दोनों पर ध्यान देने की आवश्यकता है पीएचडी विद्यार्थियों को अप्लाइड रिसर्च, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, नए इनोवेशन एवं नवाचारों पर ध्यान देते हुए शोध विषय का चयन बहुत ही सावधानी पूर्वक करना चाहिए l उन्होंने कहा कि विभागों को अपनी क्षमताओं के आकलन के पश्चात सामूहिक रूप से विद्यार्थियों के शोध विषयों का चयन करना चाहिए तथा अपने संसाधनों के विकास पर जोर देना चाहिए जिससे हमारे विद्यार्थी नवाचार युक्त क्वालिटी रिसर्च देश एवं समाज के सामने प्रस्तुत कर सकें, जिसके परिणाम सकारात्मक हो एवं उन्हें रोजगार तथा व्यवसाय के साथ जोड़ा जा सकेl  

उन्होंने कहा कि क्वालिटी रिसर्च एवं नवाचार युक्त रिसर्च के द्वारा हमारे विद्यार्थी शोधार्थी एवं अनुसंधान वैज्ञानिक उच्च स्तरीय पेटेंट हासिल कर सकते हैं जिससे विश्वविद्यालय की विजिबिलिटी एवं आय दोनों बढ़ सकती हैंl उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता युक्त हाई रेटिंग के शोध प्रकाशनों में प्रकाशित शोध पत्रों के आधार पर शोधार्थी एवं विश्वविद्यालय दोनों के h-index को सुधारा जाना चाहिए जिससे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रदत रैंकिंग में अच्छा स्थान प्राप्त किया जा सकता हैl डॉ राठौड़ ने शोधार्थियों के लिए (FAITH) फेथ फॉर्मूले पर कार्य करते हुए अनुसंधान के फ्रंटल एरिया, अकादमिक  इंटरफेस, इनोवेशन, टेक्नोलोजी और ह्युमनिटी को भी ध्यान मे रखने की सलाह दी l 

उन्होंने कहा कि सत्र के प्रारंभ में ही संभावित शोध क्षेत्रों एवं विषयों की सूचना प्रदर्शित की जानी चाहिए जिससे विद्यार्थियों को संबंधित विषय एवं विषय विशेषज्ञ चुनने में आसानी रहे उन्होंने शोध के माध्यम से उच्च गुणवत्ता के प्रकाशन, पैकेज ऑफ़ प्रैक्टिस एवं पेटेंट हासिल करने पर भी जोर दिया उन्होंने कहा कि एक सुपरवाइजर को अच्छा प्रशासक, मोटीवेटर, एजुकेशननिस्ट, विजनरी एवं प्लानर भी होना चाहिए जिससे वह विद्यार्थियों के शोध को निखार सकेl  उन्होंने डीआरआई को अग्रणी शोध संस्थानों के साथ एमओयू करने तथा कृषि शोधार्थियों के लिए वर्ष में एक बार कम से कम 3 दिन का एक शोध सप्ताह मनाने की सलाह दीl बैठक मे प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ आर ए कोशिक ने भी अपने विचार रखे, अंत मे अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ पी के सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया l