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18 लाख पेड़ लगा चुकी हैं ऑपरेशन सिंदूर से चर्चित कर्नल सोफिया कुरैशी की जुड़वां बहन शायना सुनसारा
ऑपरेशन सिंदूर से चर्चित कर्नल सोफिया कुरैशी की जुड़वां बहन शायना सुनसारा ने 18 लाख पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण में मिसाल कायम की है। जानें उनकी कहानी और समाजसेवा के प्रयास।
Anil Bedag Verified Local Voice • 29 Mar, 2026Author
मई 13, 2025 • 10:51 AM 0
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“18 लाख पेड़ लगा चुकी हैं ऑपरेशन सिंदूर से चर्चित कर्नल सोफिया कुरैशी की जुड़वां बहन शायना सुनसारा”
18 लाख पेड़ लगा चुकी हैं ऑपरेशन सिंदूर से चर्चित कर्नल सोफिया कुरैशी की जुड़वां बहन शायना सुनसारा
मुंबई: ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में हैं। भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाली दो महिला ऑफिसर्स में से एक सोफिया ने अद्वितीय आत्मविश्वास के साथ इतिहास रच दिया। उनके इस साहसिक कदम ने करोड़ों भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर मिसाल कायम की।
सोफिया कुरैशी की जुड़वां बहन शायना सुनसारा, जो खुद भी एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं, ने अपनी बहन के इस कारनामे पर गर्व जताया। फौजी परिवार से ताल्लुक रखने वाली शायना को वडोदरा की 'वंडर वुमन' के नाम से जाना जाता है। शायना एक पूर्व एनसीसी आर्मी कैडेट, राइफल शूटिंग में गोल्ड मेडलिस्ट (राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित), अर्थशास्त्री, पर्यावरणविद्, फैशन डिजाइनर, मॉडल और समाजसेविका हैं।
18 लाख पेड़ लगा चुकी हैं शायना सुनसारा:
पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें देश-विदेश में खास पहचान दिलाई है। शायना अब तक 18 लाख पेड़ लगा चुकी हैं और मियावाकी फॉरेस्ट वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट पर भी उल्लेखनीय कार्य किया है। इसके अलावा, वे गरीब बच्चों की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए भी समर्पित हैं।
शायना लायंस क्लब इंटरनेशनल कमिटी में एनवायरनमेंट चेयरपर्सन भी हैं। उनकी समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को कई बड़े सम्मान भी मिले हैं, जिनमें ब्रिटिश पार्लियामेंट में ग्लोबल गांधी अवार्ड, लीडरशिप अवार्ड, और दादा साहब फाल्के अवार्ड 2018 शामिल हैं।
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सोफिया और शायना का परिवार एक लंबे समय से सेना और देशभक्ति से जुड़ा रहा है। उनके पिता 1971 के युद्ध के नायक रहे, दादा भारतीय सेना में थे, चाचा BSF में और परदादा ने ब्रिटिश सेना छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था। उनकी दादी उन्हें झांसी की रानी के साथ 1857 के विद्रोह में लड़ने वाले एक पूर्वज की कहानियां सुनाया करती थीं।
शायना ने बताया कि जब उन्होंने सोफिया को ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग देते टीवी पर देखा, तो गर्व और देशभक्ति की लहर उनके दिल में उमड़ पड़ी। उन्होंने कहा, "ऐसा लगा जैसे झांसी की रानी फिर से जिंदा हो गई हों।"
बचपन का सपना और देश सेवा:
सोफिया और शायना बचपन से ही सेना में शामिल होकर देश सेवा का सपना देखती थीं। उनकी मेहनत और लगन ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया। एक तरफ सोफिया देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए इतिहास रच रही हैं, वहीं दूसरी ओर शायना पर्यावरण और समाजसेवा के माध्यम से देश सेवा में जुटी हैं।
शायना ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सेना की सराहना की और इसे देश के लिए एक गर्व का लम्हा बताया।
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