शिक्षा मंत्री ने आरटीई के तहत स्कूलों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन लॉटरी निकाली

May 18, 2022 - 20:53
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शिक्षा मंत्री ने आरटीई के तहत स्कूलों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन लॉटरी निकाली

शिक्षा मंत्री ने आरटीई के तहत स्कूलों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन लॉटरी निकाली

कहा शिक्षा के अधिकार ने गरीब परिवारों के बच्चों के लिए भी खोले निजी स्कूलों के द्वार

शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने मंगलवार को शिक्षा संकुल में शिक्षा के अधिकार के तहत शैक्षिक सत्र 2022-23 के लिए लॉटरी निकाली। लॉटरी के आधार पर वरीयता क्रम के अनुसार बच्चों को राज्य के गैर सरकारी विद्यालयों में कक्षा-1 में 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा के अधिकार ने गरीब और अमीर के बीच की खाई को मिटाने का काम किया है। अब गरीब परिवार के बच्चों के लिए भी महंगी फीस वाली निजी स्कूलों के द्वार खुल गए हैं। उन्होंने कहा कि आरटीआई में वरियता क्रम का निर्धारण लॉटरी के माध्यम से किया गया है, जिसकी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। लॉटरी की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने में राज्य देश के अग्रणी राज्यों में से है। उन्होंने कहा कि चयन में आरक्षण का भी ध्यान रखा गया है।

डॉ. कल्ला ने कहा कि ढाई लाख रुपए तक की पारिवारिक आय वाले बच्चों का आरटीई के तहत निजी स्कूलों में एडमिशन किया गया है। इन बच्चों की फीस सरकार द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में आरटीई के तहत 8 लाख से अधिक बच्चे प्रदेश में निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। शिभा मंत्री ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा आटीई के नियमों की पालना करना अनिवार्य है। नियम नहीं मानने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा उनकी मान्यता भी रद्द् की जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्कूलों से अपेक्षा की जाती है कि आरटीई और नॉन आरटीई के बच्चों में स्कूल द्वारा किसी भी तरीके का भेदभाव नहीं अपनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि निजी शिक्षण संस्थानों के क्रियाकलापों के विनियमन के लिए राज्य सरकार द्वारा प्राधिकरण भी बनाया जा रहा है।

स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी के गोयल ने बताया कि प्रदेश में आरटीई के लिए पात्र 36 हजार 896 विद्यालयों में से 29 हजार 684 विद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन प्राप्त हुए थे। लॉटरी के लिए कुल 2 लाख 3 हजार 348 बच्चों ने आवेदन किया, जिसमें 1 लाख 09 हजार 791 बालक, 93 हजार 554 बालिकाएं तथा 3 थर्ड जेंडर बालक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा के अधिकार के तहत एक विद्यार्थी अधिकतम 5 विद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकता था।

इस अवसर पर राज्य परियोजना निदेशक मोहन लाल यादव सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।