स्वस्थ आहार गर्भवती माँ और गर्भस्थशिशु दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला जो खाती और पीती है वह उसके बच्चे के पोषण का मुख्य स्रोत है। आशा आयुर्वेदा के डाइट विशेषज्ञ विशेषज्ञ सलाह देते हैं। कि होने वाली मां के आहार में विभिन्न प्रकार के स्वस्थ खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ शामिल होने चाहिए। ताकि बच्चे के विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रदान किए जा सकें।
हमारे देश में करीब 35 लाख शिशु आसामयिक (untimely) (सही समय से पहले) जन्म लेते हैं, 15 लाख बच्चे विकार लेकर पैदा होते हैं, और हर साल 10 लाख बच्चों को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) से छुट्टी दी जाती है। ऐसे नवजात शिशुओं को मृत्यु, स्टंटिंग और विकास में देरी का बहुत अधिक जोखिम होता है।
आज प्रेगनेंसी डाइट की जागरुकता के कारण भारत ने newborn babies की मृत्यु दर कम करने में उन्नति की है। नवजात शिशुओं की मृत्यु में भारत की हिस्सेेदारी, जो वर्ष 1990 में दुनिया में नवजात शिशुओं की मृत्यु का एक तिहाई थी, आज कुल एक चौथाई से भी कम है। वर्ष 1990 की तुलना में वर्ष 2016 में भारत में हर महीने , newborn babies की मृत्यु में लगभग 10 लाख की कमी और मातृ मृत्यु में दस हजार की कमी आई है। यह अधिक से अधिक महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य सुविधाओं में कराने का ही परिणाम है।
गर्भवती महिलाओं अपनी डाइट को लेकर क्यों सतर्क रहना चाहिए -
एक हेल्दी प्रेगनेंसी को बनाए रखने के लिए हर गर्भवती महिला को प्रतिदिन लगभग 300 अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती है। ये कैलोरी प्रोटीन, फलों, सब्जियों और साबुत अनाज के संतुलित आहार से मिलती है। मिठाई और वसा का सेवन कम से कम करना चाहिए।
1. फोलिक एसिड - फोलिक एसिड बी विटामिन (विटामिन बी 9) है जो बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में जन्म दोषों को रोकने में मदद करने में महत्वपूर्ण है, जिसे न्यूरल ट्यूब दोष के रूप में जाना जाता है।
2. कैल्शियम - इस खनिज का उपयोग बच्चे की हड्डियों और दांतों के निर्माण के लिए किया जाता है।
3. आयरन - गर्भवती महिलाओं को एक दिन में 27 मिलीग्राम आयरन की आवश्यकता होती है, जो कि गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक मात्रा से दोगुना है।
4. प्रोटीन - गर्भावस्था के दौरान अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिकांश महिलाओं को अपने आहार में पर्याप्त प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ प्राप्त करने में समस्या नहीं होती है।
5. फल और सब्जियां - एक स्वस्थ गर्भावस्था में आहार में बहुत सारे फल और सब्जियां शामिल होनी चाहिए।
6. साबुत अनाज - ये खाद्य पदार्थ ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं, और ये फाइबर, आयरन और बी विटामिन भी प्रदान करते हैं।
7. डेयरी प्रोडक्ट - एक दिन में डेयरी खाद्य पदार्थों की तीन से चार सर्विंग्स का लक्ष्य रखें। दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी खाद्य पदार्थ कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन डी के अच्छे आहार स्रोत हैं।
प्रेगनेंसी में क्या नही खाना चाहिए -
कुछ ऐसे भी खाद्य पदार्थ हैं। जिनका सेवन गर्भवती महिलाओं को नही करना चाहिए। क्योंकि इनके सेवन से प्रेगनेंसी में जोखिम बढ़ने की अधिक संभावना होती है।
1. कैफीन - गर्भावस्था के दौरान बड़ी मात्रा में कैफीन का सेवन करने से गर्भपात या जन्म के समय कम वजन होने का खतरा बढ़ सकता है।
2. शराब - गर्भावस्था के दौरान शराब पीने से गर्भपात, समय से पहले जन्म और आपके बच्चे का जन्म के समय कम वजन होने का खतरा बढ़ जाता है।
3. धूम्रपान - धूम्रपान करने वाली महिलाओं को गर्भवती होने में अधिक कठिनाई होती है और उनके गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है।
महिलाओं की प्रेगनेंसी और डाइट से जुड़ी खास जानकारी प्रेसवार्ता के दौरान आशा आयुर्वेदा की निःसंतानता विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा से प्राप्त हुई।
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