अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन और श्रमरहित लाइफस्टाइल जीने से मोटापे का बढ़ रहा है खतरा

अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन और श्रमरहित लाइफस्टाइल जीने से मोटापे का बढ़ रहा है खतरा

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को कद के हिसाब से वजन के पैमाने के तौर पर देखा जाता है और 25 से ज्यादा बीएमआई होने पर अधिक वजन और 30 से अधिक होने पर मोटापा माना जाता है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के मुताबिक, यह समस्या महामारी की तरह बढ़ी है और हर साल अधिक वजन या मोटापे के कारण 2017 से हर साल 40 लाख लोगों की मौत हो रही है। 

मोटापे की बीमारी से पीड़ित दिल्ली के दो भाइयों मानविंदर सिंह गुजराल और मनप्रीत सिंह का वजन क्रमश 205 किलो और 168 किलो हो गया था, जिनकी हाल ही में मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में बैरियाट्रिक सर्जरी कराई गई। ये दोनों मोटापे से जुड़ी कई बीमारियों से जूझ रहे थे जिनमें ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नी, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां भी शामिल थीं। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, बैरियाट्रिक एंड रोबोटिक सर्जरी के प्रमुख डॉ. विवेक बिंदल के नेतृत्व में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दोनों मरीजों का पिछले माह आपरेशन किया। दोनों भाइयों का क्रमश 17 किलो और 17 किलो वजन कम हो गया।

43 वर्षीय मानविंदर का बीएमआई 79.9 है और पिछले 25 वर्षों से वह मोटापे की बीमारी से पीड़ित है। वर्ष 2020 की शुरुआत में उनका वजन 135 किलो था। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अतिरिक्त 70 किलो वजन बढ़ा लिया। इसी तरह उनका छोटा भाई पिछले 20 साल से मोटापे से जूझ रहा था और लॉकडाउन के दौरान उनका वजन भी काफी बढ़ गया था। सर्जरी के दौरान उनका वजन 168 किलो था।

दोनों भाइयों को मोटापे की वजह से परिवार और दोस्तों के बीच मजाक का पात्र बनना पड़ता था। इस वजह से वे सामाजिक कार्यक्रमों से दूर ही रहते थे। उन्हें कपड़े खरीदने में भी दिक्कत आती थी। अत्यधिक वजन के कारण उन्हें रोजमर्रा के काम करने में दिक्कतें आती थीं। इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होना शुरू हो गया था। पिछले 2 से 3 वर्षों से दोनों भाई अपने अत्यधिक वजन को कम करने का समाधान तलाशने लगे। अक्सर वे दोनों डायटिंग भी करने लगे लेकिन इससे उन्हें मनमाफिक लाभ नहीं मिला। उन्होंने कई आयुर्वेदिक दवाइयां भी आजमाईं लेकिन इनसे भी वजन कम नहीं हुआ। इन दोनों मामलों के बारे में डॉ. विवेक बिंदल ने कहा, श्मानविंदर की स्थिति गंभीर थी क्योंकि वह लिवर सिरोसिस से भी पीड़ित था। इससे बड़ी दिक्कतें हो रही थीं जिन्हें तत्काल दूर करने की जरूरत थी। इसी तरह मनप्रीत को डायबिटीज और हाइपरटेंशन था। हमने मनप्रीत पर रोबोटिक बैरियाट्रिक सर्जरी अपनाई जबकि मानविंदर की लेपरोस्कोपिक बैरियाट्रिक सर्जरी और कोलेसिस्टेक्टोमी की। दोनों केस में चुनौतियां थी एनेस्थेसिया का उन्हें नियंत्रित रखना, चर्बी की परत के अंदर पेट तक पहुंच बनाना, ओटी टेबल पर उन्हें फिट रखना आदि।

डॉ. बिंदल आगाह करते हैं कि अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन और श्रमरहित लाइफस्टाइल जीने से मोटापे का खतरा बढ़ जाता है और इस वजह से बच्चों तथा वयस्कों में टाइप टू डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कार्डियक समस्याओं समेत कई प्रतिकूल परिणाम भी सामने आने लगते हैं। दोनों भाइयों के मामले डॉक्टरों का कहा कि मोटापा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभाव के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

डॉ. बिंदल ने कहा, अधिकारियों, डॉक्टरों और फिजिशियनों को भी स्वस्थ जीवनशैली, खानपान की आदतें और शारीरिक गतिविधियां जारी रखने के फायदे गिनाते रहना चाहिए वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रमुख डॉ. कौसर शाह ने कहा, मोटापा लाइफ स्टाइल से जुड़ी एक बड़ी बीमारी है और इस वजह से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कार्डियक समस्याएं, अनिद्रा, जोड़ों का दर्द, निःसंतानता आदि जैसी कई गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती हैं। 

हालांकि विशेषज्ञ इस विनाशकारी और गंभीर बीमारियों की वजह बनने वाली समस्या से निजात दिलाने और इलाज कराने में मदद कर सकते हैं और यह खास विशेष मामला इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि कैसे सुपर स्पेशियलाइज्ड प्रक्रियाएं न सिर्फ मरीज के जीवन में बल्कि समस्त परिवार के लिए अनुकूल बदलाव ला सकती हैं। इस तरह की प्रक्रियाएं अनियंत्रित मोटापा और संबंधित बीमारियों से पीड़ित कई सारे मरीजों की मदद कर चुकी हैं।