सांसद राजकुमार चाहर ने लॉन्च किया 'हिंदू वीर बलिदानी गोकुला जाट' पर शौर्य गीत; कर्मवीर चाहर ने निभाया मुख्य किरदार
फतेहपुर सीकरी के लोकप्रिय सांसद श्री राजकुमार चाहर ने महान हिंदू योद्धा और किसान रक्षक वीर गोकुला जाट के अदम्य साहस को समर्पित एक विशेष 'शौर्य गीत' (Music Video) जारी किया है।
Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026Editor
मार्च 25, 2026 • 4:37 PM | आगरा 0 Last Edited By:Junja Ram
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सांसद राजकुमार चाहर ने लॉन्च किया 'हिंदू वीर बलिदानी गोकुला जाट' पर शौर्य गीत; कर्मवीर चाहर ने निभाया मुख्य किरदार
फतेहपुर सीकरी के लोकप्रिय सांसद श्री राजकुमार चाहर ने महान हिंदू योद्धा और किसान रक्षक वीर गोकुला जाट के अदम्य साहस को समर्पित एक विशेष 'शौर्य गीत' (Music Video) जारी किया है।
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सांसद राजकुमार चाहर ने लॉन्च किया 'हिंदू वीर बलिदानी गोकुला जाट' पर शौर्य गीत; कर्मवीर चाहर ने निभाया मुख्य किरदार
आगरा : फतेहपुर सीकरी के लोकप्रिय सांसद श्री राजकुमार चाहर ने महान हिंदू योद्धा और किसान रक्षक वीर गोकुला जाट के अदम्य साहस को समर्पित एक विशेष 'शौर्य गीत' (Music Video) जारी किया है। इस गीत का उद्देश्य औरंगजेब के दमनकारी शासन के विरुद्ध किसानों की पहली संगठित आवाज उठाने वाले नायक की गाथा को जन-जन तक पहुँचाना है।
इस गौरवशाली वीडियो में कर्मवीर चाहर ने 'वीर गोकुला' के मुख्य किरदार को जीवंत किया है। इस भव्य प्रोजेक्ट का निर्माण श्री रंजीत सामा और सांसद राजकुमार चाहर ने मिलकर किया है। गीत के बोल संजय दुबे द्वारा लिखे गए हैं, जबकि इसे मोहम्मद सलमान ने अपनी आवाज दी है। संगीत निर्देशन पंडित दिलीप ताहिर का है और निर्देशन हेमंत वर्मा ने किया है, वहीं छायांकन की कमान रमेश सामंत ने संभाली है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कौन थे वीर गोकुला?
गोकुला जाट (गोकुल देव) 17वीं शताब्दी के एक पराक्रमी जमींदार और नायक थे, जिन्होंने औरंगजेब की भेदभावपूर्ण धार्मिक और आर्थिक नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला था। 1669 में उनके नेतृत्व में हुआ जाट विद्रोह, मुगल शासन के खिलाफ भारत के सबसे पहले संगठित किसान आंदोलनों में से एक माना जाता है। इसी विद्रोह ने आगे चलकर भरतपुर राज्य के उदय की नींव रखी।
1669 के संघर्ष के दौरान, गोकुला ने लगभग 20,000 किसानों को एकजुट किया और 'तिलपत के युद्ध' में मुगल फौजदार अब्दुल नबी खान को परास्त कर मौत के घाट उतार दिया। सादाबाद छावनी को ध्वस्त करने के बाद, अंततः तिलपत की घेराबंदी में चार दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद उन्हें बंदी बना लिया गया। 1 जनवरी 1670 को आगरा में मुगल सत्ता ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उनके शरीर के अंग-अंग काटकर उन्हें शहीद कर दिया, लेकिन वे अंत तक अडिग रहे।
सांसद का संदेश इस अवसर पर सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि वीर गोकुला जाट का बलिदान केवल एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों और स्वाभिमान की रक्षा के लिए था। उन्होंने बताया कि यह शौर्य गीत हमारी युवा पीढ़ी को अपने वास्तविक नायकों और उनके संघर्षों से परिचित कराने का एक प्रयास है।
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