डॉ. सुनीता चौधरी डिया: ‘मेवाड़ी रंग (घूमर)’ के माध्यम से परंपरा और वैश्विक भावना का अद्भुत संगम
डॉ. सुनीता चौधरी डिया अपनी पहल ‘मेवाड़ी रंग (घूमर)’ से राजस्थानी विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रही हैं, जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण है।
Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026Editor
मार्च 30, 2026 • 9:29 PM 0
र
राजस्थान
NEWS CARD
“डॉ. सुनीता चौधरी डिया: ‘मेवाड़ी रंग (घूमर)’ के माध्यम से परंपरा और वैश्विक भावना का अद्भुत संगम”
Read more onhindi.sangritoday.com/s/7e3166
30 Mar 2026
https://hindi.sangritoday.com/s/7e3166
Copied
डॉ. सुनीता चौधरी डिया: ‘मेवाड़ी रंग (घूमर)’ के माध्यम से परंपरा और वैश्विक भावना का अद्भुत संगम
Key Highlights
डॉ. सुनीता चौधरी डिया की पहल 'मेवाड़ी रंग (घूमर)' राजस्थानी संस्कृति का वैश्विक प्रचार कर रही है।
यह पहल सदियों पुरानी घूमर नृत्य परंपरा को आधुनिक मंचों पर जीवंत कर रही है।
डॉ. डिया का प्रयास भारतीय विरासत के संरक्षण और उसे दुनिया भर में पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर है।
आज के दौर में जब सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने की चुनौती बढ़ रही है, ऐसे में कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी हैं जो अपनी जड़ों से जुड़कर, अपनी परंपरा को वैश्विक पटल पर ले जाने का बीड़ा उठाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक हस्ती हैं डॉ. सुनीता चौधरी डिया, जिन्होंने अपनी पहल ‘मेवाड़ी रंग (घूमर)’ के ज़रिए राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान दी है। उनका यह प्रयास ‘परंपरा में निहित, वैश्विक भावना से ओत-प्रोत’ की अवधारणा का सटीक उदाहरण है।
डॉ. सुनीता चौधरी डिया के नेतृत्व में ‘मेवाड़ी रंग (घूमर)’ सिर्फ एक नृत्य समूह नहीं, बल्कि राजस्थानी संस्कृति, विशेषकर घूमर नृत्य को समर्पित एक आंदोलन है। यह पहल प्राचीन घूमर की बारीकियों को संजोए रखते हुए उसे समकालीन दर्शकों के लिए प्रासंगिक बना रही है। यह दिखाता है कि कैसे एक पारंपरिक कला रूप वैश्विक दर्शकों को भी आकर्षित कर सकता है, बिना अपनी मूल पहचान खोए।
घूमर, जो मूल रूप से मेवाड़ के भील समुदाय का नृत्य था और बाद में शाही दरबारों का हिस्सा बना, आज डॉ. डिया के प्रयासों से दुनिया के कोने-कोने में अपनी छटा बिखेर रहा है। उनके समूह के कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और संगीत के साथ घूमर की मनमोहक प्रस्तुतियों के ज़रिए दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित कराते हैं। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक शिक्षा का माध्यम भी है।
💡 Did You Know? घूमर नृत्य का नाम 'घूमना' शब्द से लिया गया है, जो नर्तकियों के घेरे में घूमने और उनके घाघरे के घूम से उत्पन्न होता है। यह अक्सर विशेष अवसरों और त्योहारों पर किया जाता है।
डॉ. सुनीता का दृष्टिकोण स्पष्ट है: विरासत को संरक्षित करना और उसे दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना। उनका मानना है कि हमारी संस्कृति हमारी पहचान है, और इसे बढ़ावा देने से न केवल हमारी जड़ों को मज़बूती मिलती है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु भी बनता है। उनके कार्य ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कई दरवाज़े खोले हैं।
क्या आप व्हाट्सऐप पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
व्हाट्सऐप पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
उनके नेतृत्व में, ‘मेवाड़ी रंग (घूमर)’ ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शन किया है, जहाँ इसे अपार सराहना मिली है। यह समूह न केवल घूमर नृत्य को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि इसके माध्यम से राजस्थान के रंगीन इतिहास, कला और लोकगीतों को भी वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। यह एक सांस्कृतिक राजदूत के रूप में कार्य कर रहा है, जो भारतीयता का गौरव बढ़ाता है।
डॉ. सुनीता चौधरी डिया का यह समर्पण और कठोर परिश्रम प्रेरणादायक है। उनका काम इस बात का प्रमाण है कि लगन और सही दृष्टिकोण से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को न केवल बचा सकते हैं, बल्कि उसे विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित भी कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों के योगदान से ही हमारी समृद्ध परंपराएं अगली पीढ़ियों तक पहुंच पाती हैं और उन्हें गर्व महसूस कराती हैं। उनका यह कार्य समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है, ठीक वैसे ही जैसे ‘Influencer & Business Super Excellence Award’ में सम्मानित होने वाले अन्य व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं।
Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026Editor
Sangri Today is a Weekly Bilingual Newspaper and website of news and current affairs that publishes news reports from various places, from general reports to opinion, analysis and fact checks.