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फेविकोल की खास हाजिरजवाबी और अपनापन लिए हुए , ‘कुर्सी पे नजर ’ भारतीय समाज में गहराई से बसी एक सच्चाई को दिखाती है। इस समाज में , कुर्सी पर कौन बैठता है , कौन उसका इंतजार करता है , और अगली बार कौन उस पर नजर गड़ाए बैठा है , ये सभी बातें अक्सर लोगों की महत्वाकांक्षा , असर और तरक्की के बदलते समीकरणों को दिखाती हैं। यह फिल्म इस रोजमर्रा की बात को एक यादगार कहानी में बदल देती है , और फेविकोल की इस काबिलियत को और मजबूत करती है कि वह आम पलों में भी बेहतरीन कहानियां ढूंढ़ लेता है।
यह नया कैंपेन ब्रांड के सफर में एक अहम पड़ाव भी है। ‘कुर्सी पे नजर ’ फेविकोल का फाइनल कैंपेन है जिसे विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे ने बनाया है। यह एक ऐसी क्रिएटिव साझेदारी रही है जिसने दशकों से ब्रांड की खास पहचान बनाई है , और फेविकोल के हास्य और सोच को भारत की सामूहिक यादों में हमेशा के लिए बसा दिया है।
इस लॉन्च पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री सुधांशु वत्स , मैनेजिंग डायरेक्टर , पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कहा कि “फेविकोल हमेशा से ही इंसानी जिंदगी की उन सीधी - सादी सच्चाइयों के लिए जाना जाता रहा है , जिन्हें इतने प्यारे अंदाज में बताया जाता है कि वे ग्राहकों के दिलों को गहराई से छू जाती हैं। ‘कुर्सी पे नजर ’ एक ऐसी अनोखी भारतीय सोच पर आधारित है जो हर दफ्तर , घर और संस्थान में देखने को मिलती है , जहां ‘कुर्सी ’ उम्मीद , बदलाव और महत्वाकांक्षा का प्रतीक होती है। पीयूष पांडे में यह असाधारण काबिलियत थी कि वे रोजमर्रा की ऐसी आम बातों को फेविकोल के लिए बेहतरीन कहानियों में बदल देते थे। यह फिल्म एक सीधे - सादे , लेकिन बहुत ही दमदार विचार के जरिए उसी विरासत को आगे बढ़ाती है। ये एक ऐसा विचार जो पूरी तरह से फेविकोल की पहचान है। ”
प्रसून पांडे , डायरेक्टर , कॉरकॉयज फिल्म्स , ने कहा कि “यह हम सबके लिए अब तक की सबसे मुश्किल फिल्म थी। यह पीयूष का आइडिया था , जो हमेशा की तरह जादुई था। हम सबने उनके साथ इस पर बहुत विस्तार से चर्चा की , लेकिन फिर अचानक वह हमें छोड़कर चले गए। हमें खुद को संभालने के लिए कुछ समय चाहिए था , इसलिए हमने फिल्म की शूटिंग पांच महीने बाद करने का फैसला किया। यह कहानी जिंदगी के गहरे अनुभवों को दिखाती है , लेकिन इसे फेविकोल के अनोखे ह्यूमर और सादगी के साथ पेश किया गया है। ”
कैनाज करमाकर और हर्षद राज्याध्यक्ष , ग्रुप सीसीओज , ओगिल्वी इंडिया ने कहा कि “यह हमारे लिए कभी भी सिर्फ एक फिल्म नहीं हो सकती। यह एक सफर था , एक तरह की तीर्थयात्रा , उस रास्ते पर जो पीयूष ने न सिर्फ ओगिल्वी के लिए , बल्कि हमारे पूरे प्रोफेशनल के लिए बनाया था। इसका मुख्य आइडिया पीयूष ने ही सोचा था , और उनके विजन को पूरा करने का जो दबाव था , वैसा अनुभव या कल्पना हमने पहले कभी नहीं की थी। ”
‘कुर्सी पे नजर ’ फेविकोल की जमीनी कहानियों की विरासत को आगे बढ़ाती है , जहां हास्य , गहरी सोच और सांस्कृतिक सच्चाई मिलकर ऐसा संदेश बनाते हैं जो सरल होने के साथ - साथ बहुत यादगार भी होता है। यह फिल्म एक अनोखी भारतीय सोच के जरिए मजबूत रिश्तों के ब्रांड के फ़लसफ़े को और मजबूत करती है।
पिडिलाइटः परिचय
पिडिलाइट इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत में एडहैसिव्स और सीलेंट , कंस्ट्रक्शन कैमिकल्स , क्रॉफ्ट्समैन प्रोडक्ट्स , डीआईवाई ( डू - इट - योरसेल्फ ) प्रोडक्ट्स और पॉलिमर इमल्शन का प्रमुख निर्माता होने के साथ एक जानी - मानी कंपनी है। इसके प्रोडक्ट्स की श्रेणी में पेंट कैमिकल्स , ऑटोमोटिव कैमिकल्स , आर्ट मैटीरियल्स और स्टेशनरी , फ्रेब्रिक केयर , मेंटनेंस कैमिकल्स , इंडस्ट्रियल एडहैसिव्स , इंडस्ट्रियल रेजिंस और आर्गेनिक पिगमेंट्स और प्रिपरेशंस मिक्स भी शामिल हैं। अधिकांश उत्पादों को मजबूत इन - हाउस आरएंडडी के माध्यम से विकसित किया गया है।
पिडिलाइट का प्रमुख ब्रांड फेविकोल , भारत के हर घर में जाना - पहचाना नाम है , जो भरोसे और विश्वसनीयता का दूसरा नाम बन चुका है। इसके दूसरे मशहूर ब्रांड्स में एम - सील , फेविक्विक , फेविस्टिक , रॉफ , डॉ . फिक्सिट , एराल्डाइट और फेविक्रिल हैं।
पिडिलाइट के बारे में और जानने के लिए यहां जाएं : www.pidilite.com
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