अखिलेश यादव का स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर पर बड़ा हमला: 'प्रीपेड पीड़ित' नाम दिया, सरकार और कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप
अखिलेश यादव ने स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को 'प्रीपेड पीड़ित' करार दिया, भाजपा सरकार और बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं को परेशान करने और मिलीभगत का आरोप लगाया।
Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026Editor
अप्रैल 5, 2026 • 8:14 PM 0
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अखिलेश यादव का स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर पर बड़ा हमला: 'प्रीपेड पीड़ित' नाम दिया, सरकार और कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप
अखिलेश यादव ने स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को 'प्रीपेड पीड़ित' करार दिया, भाजपा सरकार और बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं को परेशान करने और मिलीभगत का आरोप लगाया।
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अखिलेश यादव का स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर पर बड़ा हमला: 'प्रीपेड पीड़ित' नाम दिया, सरकार और कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप
Key Highlights
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को 'प्रीपेड पीड़ित' करार दिया है।
उन्होंने भाजपा सरकार और बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं को 'उप-भोक्ता' बनाकर परेशान करने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने सरकार और बिजली कंपनियों के बीच मिलीभगत का भी गंभीर आरोप लगाया है।
अखिलेश यादव का स्मार्ट मीटर पर तीखा हमला: 'प्रीपेड पीड़ित' नया नाम
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों का मुद्दा गरमाया हुआ है, और इस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इन मीटरों से प्रभावित उपभोक्ताओं के लिए 'प्रीपेड पीड़ित' जैसा एक नया और मार्मिक शब्द गढ़ा है, जो सीधे तौर पर इन मीटरों के कारण होने वाली परेशानियों को दर्शाता है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में उपभोक्ता अब 'उप-भोक्ता' बन गए हैं, जिन्हें बिजली कंपनियों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है।
सरकार और कंपनियों के बीच मिलीभगत का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली कंपनियां और सरकार आपस में मिलीभगत कर रही हैं। उनके अनुसार, यह मिलीभगत आम जनता को आर्थिक रूप से निचोड़ने का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों द्वारा मीटर लगाने के लिए भारी शुल्क वसूलना, मनमाने ढंग से बिलिंग करना और बिजली कनेक्शन अचानक काट देना, ये सभी इस मिलीभगत के स्पष्ट संकेत हैं।
उपभोक्ताओं की परेशानियाँ और मनमानी बिलिंग
यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कई उपभोक्ताओं को बिना किसी सूचना के या कम बैलेंस पर भी बिजली से वंचित कर दिया जाता है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, खासकर रीडिंग में अनियमितताओं और मीटरों के अचानक काम करना बंद कर देने जैसी शिकायतों को लेकर। उनका कहना था कि ये मीटर केवल सरकार और कंपनियों के फायदे के लिए हैं, न कि जनता के लिए।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर का यह मुद्दा अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया है। अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेता इसे जनता के उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के रूप में पेश कर रहे हैं। वे लगातार सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की मांग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में इस तरह के जन-मुद्दे अक्सर राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन जाते हैं। हाल ही में, डॉ. अभिषेक वर्मा ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी के 13वें संकल्प दिवस सम्मेलन में भाग लिया, जो दर्शाता है कि विभिन्न राजनीतिक दल राज्य में जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
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समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपनी आवाज बुलंद कर रही है और आने वाले समय में इसे और बड़ा मुद्दा बनाने की संभावना है। सरकार की ओर से हालांकि इन आरोपों का खंडन किया जा सकता है और स्मार्ट मीटर को बिजली चोरी रोकने तथा बिलिंग में पारदर्शिता लाने का एक प्रभावी तरीका बताया जा सकता है, लेकिन विपक्ष के इन हमलों से उपभोक्ताओं की चिंताएँ और बढ़ सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या उपभोक्ताओं को 'प्रीपेड पीड़ित' बनने से रोकने के लिए कोई कदम उठाए जाते हैं।
FAQ
स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर क्या हैं? स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर ऐसे आधुनिक मीटर होते हैं जिनमें उपभोक्ता को बिजली का उपयोग करने से पहले रिचार्ज करवाना होता है, ठीक वैसे ही जैसे मोबाइल फोन में प्रीपेड रिचार्ज होता है। ये मीटर बिजली की खपत को वास्तविक समय में ट्रैक करते हैं और कम बैलेंस होने पर या रिचार्ज खत्म होने पर बिजली अपने आप काट देते हैं।
अखिलेश यादव ने 'प्रीपेड पीड़ित' शब्द का इस्तेमाल क्यों किया? अखिलेश यादव ने 'प्रीपेड पीड़ित' शब्द का इस्तेमाल उन उपभोक्ताओं की स्थिति को उजागर करने के लिए किया है जो स्मार्ट प्रीपेड मीटर के कारण विभिन्न परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इन परेशानियों में अचानक बिजली कटना, मनमानी बिलिंग, रिचार्ज की दिक्कतें और कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क शामिल हैं। उनका मानना है कि ये मीटर उपभोक्ताओं को पीड़ित कर रहे हैं।
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