कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’

हैदराबाद, तेलंगाना, भारत पीढ़ियों से इस कला में माहिर भारतीय हैंडलूम (हथकरघा) बुनकरों को उन्हीं की अपनी कहानी से बाहरRead Now ►

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NewsVoir Verified Media or Organization • 27 Mar, 2026 Editor
अप्रैल 27, 2026 • 1:37 PM  0
Last Edited By: Sangri Today (2 hours ago)
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कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’
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कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’
कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’

हैदराबाद, तेलंगाना, भारत : पीढ़ियों से इस कला में माहिर भारतीय हैंडलूम (हथकरघा) बुनकरों को उन्हीं की अपनी कहानी से बाहर किया जा रहा था। उनके द्वारा बनाए गए कपड़े या तो संग्रहालयों तक सीमित रह गए या उन पर केवल “एथनिक वियर” (ethnic wear) का ठप्पा लगा दिया गया। इस बीच उनकी आजीविका अनिश्चित होती गई और उनका ज्ञान धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया।

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