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आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचना ही सच्ची सेवा है - गणपत बांठिया
समाज सेवक होने का सबसे पसन्दीदा पहलू कौनसा है, यह पूछने पर उन्होने कहा कि समस्याएँ ढूँढना और उन्हे सुलझाना यह है।
Vinita Kotwani Editor
जुलाई 15, 2022 • 4:02 PM 0
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Sangri Today Hindi
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Vinita Kotwani
4 years ago
आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचना ही सच्ची सेवा है - गणपत बांठिया
समाज सेवक होने का सबसे पसन्दीदा पहलू कौनसा है, यह पूछने पर उन्होने कहा कि समस्याएँ ढूँढना और उन्हे सुलझाना यह है।
Full Story: https://hindi.sangritoday.com/true-service-is-to-reach-out-to-the-person-standing-in-the-last-row-ganpat-banthia
आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचना ही सच्ची सेवा है - गणपत बांठिया
समाज सेवक होने का सबसे पसन्दीदा पहलू कौनसा है, यह पूछने पर उन्होने कहा कि समस्याएँ ढूँढना और उन्हे सुलझाना यह है।
कभी कभी हमें लगता है कि गरीबी का अर्थ सिर्फ खाली पेट होना, नंगा और बेघर होना है। किसी को न चाहने की, प्रेम न करने की और देखभाल न करने की गरीबी सबसे बड़ी गरीबी है। इस गरीबी को दूर करने के लिए अनिवार्य रूप से हमें पहले अपने घरों में शुरुआत करनी चाहिए। बच्चे, संकट में फंसे किशोर, शोषित महिलाएँ और बेघर व्यक्तियों के लिए यह दुनिया एक बड़ी डरावनी जगह हो सकती है। अधिक सुरक्षित, अधिक सुरक्षा होनेवाला घर एक व्यक्ति से ही शुरू होता है।
13 जून को जन्म दिन होनेवाले दृरदृष्टि के नेता गणपत बांठिया बलोत्रा के सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक और उद्यमी हैं। उनके राजनीतिक और सामाजिक कार्य के करिअर में गणपत बांठिया ने भारतीय जनता पार्टी (राजस्थान) में कार्यकारी सदस्य के तौर पर, आईटीआई कॉलेज के अध्यक्ष (सिवाना), “ चंपालाल बांठिया चॅरीटेबल ट्रस्ट (एक एनजीओ)” के अध्यक्ष, सीईपीटी ट्रस्ट और और लघु उद्योग मण्डल (बलोत्रा) के सचिव और जोधपूर लघु उद्योग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के बिजनेस विभाग के उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया है और वे बलोत्रा के लघु उद्योग भारती के संस्थापक सदस्य हैं।
उनका विश्वास है कि लोग या तो किसी चीज़ की तरफ जाते हैं या उससे दूर जाते हैं। सफल सामाजिक कार्यकर्ता वे होते हैं जो अपने उद्देश्य और लक्ष्य की ओर दृढनिश्चय से चलते हैं, उन्हे अवरोधों के बजाय सम्भावनाओं में यकीन करने के लिए प्रेरणा मिलती है। असफल होने के खतरे के बजाय वे प्रयास न करने से डरते हैं। समाज सेवक होने का सबसे पसन्दीदा पहलू कौनसा है, यह पूछने पर उन्होने कहा कि समस्याएँ ढूँढना और उन्हे सुलझाना यह है।
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सबसे सन्तोष देनेवाला क्षण तब आता है जब ऐसी कोई चुनौति होती है जिसपर उन्होने मात दी हो। यह सबसे बड़ा सन्तोष का क्षण होता है। ‘आपके पास सही कल्पना है, ऐसा आपको कब पता चलता है,’ ऐसा पूछने पर वे कहते हैं, “कभी कभी सबसे उचित या सही कल्पना आने के पहले आपके पास बहुत सी अच्छी संकल्पनाएँ होती है। सही कल्पना के बारे में यह अलग होता है कि उससे आपको आपको लगता है कि आपको जिस में विश्वास है, वह कल्पना उसे दर्शाती है, आपने अब तक सिखी हुई और आपके अनुभव में आयी हुई सभी चीजें वह कल्पना दर्शाती है और आपको लगता है कि अब तक आपने जो सीखा था और जो आपके अनुभव में आया था, वे आपको उसी की तरफ ले जाती है। वह कई मायनों में और मापदण्डों पर आपको उचित और सही लगती है।”
काफी समझ बुझ कर परिस्थिति के सभी पहलूओं पर गौर पर और सम्भाव्य उपायों पर सोचने पर यह मिलता है। अक्सर कठिन सड़क उच्च उद्देश्यों की तरफ ले जाती है, इसलिए वे खुद को उसकी याद दिलाते रहते हैं और मिली हुई समझ और आगे के रास्ते पर ध्यान देते हैं, क्यों कि हमेशा ही हम कुछ ना कुछ सीख सकते हैं। सन्देह हो, तो खुद पर और अपने भीतर की आवाज पर (आपके हृदय के भाव पर) विश्वास कीजिए।
अगर आप सौभाग्यशाली हैं, तो आपको विश्वास के योग्य मित्र या मार्गदर्शक मिलते हैं जो आवश्यक होने पर आपको मार्गदर्शन देते हैं| हम सबके पास होनेवाली खामियाँ और दोष दिखाना सरल है लेकिन अपने तरफ देखना और खुद को बदलने का निर्णय लेना बहुत कठिन होता है| यह पहला कदम हमें ही उठाना होता है।
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