प्रेम मंदिर जन्माष्टमी की 10 बातें जो आपको अवश्य जाननी चाहिए
इस पावन उत्सव में, वृंदावन का प्रेम मंदिर विशेष स्थान रखता है। यहाँ की जन्माष्टमी का उत्सव जितना विशाल होता है, उतना ही हृदय को छू लेने वाला भी होता है।
श्री वृंदावन धाम की जन्माष्टमी केवल भारत ही नहीं, पूरे विश्व में अपनी भव्यता और भक्ति-भाव के लिए प्रसिद्ध है। इस पावन उत्सव में, वृंदावन का प्रेम मंदिर विशेष स्थान रखता है। यहाँ की जन्माष्टमी का उत्सव जितना विशाल होता है, उतना ही हृदय को छू लेने वाला भी होता है। हर वर्ष, लाखों-लाख श्रद्धालु इस दिव्य मंदिर में एकत्रित होकर नन्हे कान्हा के जन्मोत्सव में भाग लेते हैं।
जन्माष्टमी की रात्रि में प्रेम मंदिर में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ता है, जिसमें हर कोई अपने हृदय में बाल गोपाल की छवि सँजोए, उनके गुणगान में डूबा रहता है। “हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैया लाल की” की जयकार और भजन-कीर्तन पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। भीड़ चाहे जितनी हो, भक्ति-भाव में कोई कमी नहीं आती।
जन्माष्टमी की रात्रि ठीक 12 बजे ठाकुर जी का भव्य अभिषेक किया जाता है। नन्हे श्रीकृष्ण के बाल रूप का यह दर्शन भक्तों की आँखों में आँसू ला देता है। चारों ओर कीर्तन, नृत्य और उल्लास का ऐसा माहौल होता है मानो स्वयं श्रीकृष्ण पुनः अवतरित हो गए हों।
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Chat on WhatsAppप्रेम मंदिर जन्माष्टमी का संपूर्ण कार्यक्रम जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर LIVE प्रसारित होता है, जिसे देश-विदेश के लाखों भक्त घर बैठे देखते हैं। इससे वे प्रत्यक्ष उपस्थित न होकर भी ठाकुर जी की कृपा का अनुभव कर पाते हैं।
आप 16 अगस्त तो रात 9 बजे से 1 बजे के बीच प्रेम मंदिर से जन्माष्टमी महा-महोत्सव का LIVE प्रसारण नीचे दिए गए लिंक पर देख सकते हैं।
https://www.youtube.com/live/dRyJY6UXSzI
4) शृंगार
जन्माष्टमी की रात्रि में श्री कृष्ण का भव्य शृंगार होता है। इसमें सुनहरे और रजत आभूषण, मोतियों और रत्नों से जड़ा मुकुट, चमकीले रेशमी वस्त्र, और सुगंधित फूलों की मालाएँ शामिल होती हैं। गजरा, चंदन का तिलक और गुलाब के फूलों की सजावट उनके दिव्य रूप को और भी मनमोहक बना देती है। इसके पश्चात् ठाकुर जी को सुसज्जित झूले में विराजित कर भक्तों के दर्शन हेतु लाया जाता है। यह झूला झुलाने का क्षण भावुक जनों के मन में प्रेम और भक्ति की विशेष अनुभूति कराता है।
5) छप्पन भोग
शृंगार के उपरांत ठाकुर जी को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है जो भक्तिभाव और स्वाद का अद्वितीय संगम होता है। इसमें 56 प्रकार के विविध पकवान शामिल होते हैं – सुगंधित खीर, माखन-मिश्री, लड्डू, पेड़ा, रसमलाई, मालपुआ, हलवा, पूरी, कचौरी, पनीर की सब्जियाँ, मौसमी फल, सूखे मेवे और कई प्रकार के पेय पदार्थ। यह भोग भगवान के बालरूप की प्रिय वस्तुओं के अनुसार सजाया जाता है।
प्रेम मंदिर की स्थापना विश्व के पंचम मूल जगद्गुरु, श्री कृपालु जी महाराज ने की थी, जिन्हें 1957 में काशी विद्वत् परिषद् द्वारा जगद्गुरु की मूल उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने 91 वर्ष के अपने जीवन को पूर्ण रूप से श्री राधा-कृष्ण भक्ति के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने साधारण मनुष्यों के लिए भक्ति को अपने जीवन में उतारने हेतु कई किताबें लिखी हैं जिमें प्रेम रस सिद्धांत, प्रेम रस मदिरा और राधा गोविन्द गीत प्रमुख हैं। इनके प्रवचन टी.वी. और यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा स्थापित अनेक निःशुल्क अस्पताल, स्कूल, कॉलेज आदि आज भी गरीबों की सहायता कर रहे हैं।
प्रेम मंदिर, वृन्दावन में भक्तों की भारी भीड़।
7) भक्ति मंदिर और कीर्ति मंदिर
प्रेम मंदिर के समान, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा दो अन्य मंदिर भी स्थापित किए गए हैं, जो अत्यंत लोकप्रिय हैं। भक्ति मंदिर उनके जन्मस्थान श्री कृपालु धाम - मनगढ़ में स्थापित है, जहाँ लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। दूसरा प्रमुख मंदिर, कीर्ति मंदिर है जो बरसाना में स्थित है। यह मंदिर श्री राधा की माता जी के नाम पर बना है। यह विश्व का इकलौता मंदिर है, जिसमें श्री राधा रानी अपने बाल स्वरूप में माता कीर्ति मैया की गोद में विराजित हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर प्रेम मंदिर परिसर में कई जीवंत झाँकियाँ सजाई जाती हैं – जैसे पूतना उद्धार, कालिया दमन, गोवर्धन धारण, माखन चोरी, वसुदेव बाबा द्वारा श्री कृष्ण को यमुना पार कराना आदि। इन झाँकियों की सजीवता और कलात्मकता देखकर लगता है मानो यह लीलाएँ साक्षात् आँखों के सामने हो रही हों।
प्रेम मंदिर की रात को और भी अद्वितीय बना देता है इसका लाइट शो। रंग-बिरंगी रोशनी, फव्वारों के साथ नृत्य करती जलधाराएँ, और पृष्ठभूमि में श्री कृपालु जी महाराज के भजन– यह सब मिलकर एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं। इस लाइट शो में पानी के ऊपर वीडियो प्रोजेक्ट किया जाता है है जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से प्रेम मंदिर आते हैं।
चाहे आप पहली बार प्रेम मंदिर की जन्माष्टमी देखने जा रहे हों या हर वर्ष आते हों, यह अनुभव सदैव नया और हृदयस्पर्शी होता है। भक्तों का उल्लास, मंदिर की सजावट, लीलाओं की झलकियाँ और ठाकुर जी के दिव्य दर्शन – यह सब मिलकर इस उत्सव को अद्वितीय बना देते हैं।
प्रेम मंदिर की जन्माष्टमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भक्ति, आनंद और प्रेम का ऐसा महासागर है जिसमें डूबकर हर भक्त अपने जीवन का सबसे सुंदर क्षण अनुभव करता है। यदि आपने अब तक इस अद्भुत उत्सव को प्रत्यक्ष नहीं देखा है, तो यह अनुभव अवश्य प्राप्त करें – चाहे स्वयं आकर, या LIVE प्रसारण के माध्यम से। यह वह अवसर है, जब आप श्रीकृष्ण की कृपा और प्रेम की मधुरता को भीतर से अनुभव कर सकते हैं।
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