मानसून का प्रचंड असर: तीसरे दिन भी सुबह से बूंदाबांदी, 5 से 8 जुलाई तक कई राज्यों में भारी बारिश और बिजली का येलो अलर्ट
देशभर में मानसून का असर तेजी से बढ़ा है। लगातार तीसरे दिन भी सुबह से बूंदाबांदी जारी है, जबकि 5 से 8 जुलाई तक कई राज्यों में भारी बारिश और बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026Editor
जुलाई 4, 2026 • 1:25 PM 0
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राजस्थान
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4 Jul 2026
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Key Highlights
देश के कई हिस्सों में मानसून का प्रभाव तेजी से बढ़ा।
लगातार तीसरे दिन भी सुबह से रुक-रुक कर बूंदाबांदी जारी।
5 से 8 जुलाई तक भारी बारिश और बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी।
देशभर में मानसून का बढ़ता प्रभाव: तीसरे दिन भी बूंदाबांदी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में मानसून ने अपनी दस्तक और मजबूत कर दी है। पिछले दो दिनों से जारी बूंदाबांदी का सिलसिला तीसरे दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए हुए हैं, जिससे दिन के तापमान में गिरावट आई है और मौसम सुहाना बना हुआ है। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए चेतावनी जारी कर दी है, जिससे लोगों में सतर्कता देखने को मिल रही है।
5 से 8 जुलाई तक भारी बारिश और वज्रपात का येलो अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 5 जुलाई से 8 जुलाई तक देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। यह अलर्ट मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड सहित कम से कम 15 राज्यों के लिए है। आईएमडी के अनुसार, इस दौरान 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां मानसून सक्रिय है, वहां अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कई राज्यों में बाढ़ और बिजली गिरने से नुकसान
मानसून के शुरुआती दौर में ही कई राज्यों में इसका प्रचंड रूप देखने को मिला है। जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटना सामने आई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में भी बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बिजली गिरने (वज्रपात) की घटनाओं में आठ लोगों की मौत की खबरें भी आई हैं, जो मानसून के दौरान सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से कश्मीर तक करीब 1500 किलोमीटर लंबी एक मानसूनी पट्टी बनी हुई है, जो उत्तर भारत में 1 से 4 जुलाई तक भारी बारिश का कारण बनी है और आगे भी इसका असर दिख सकता है।
💡 Did You Know? वज्रपात या बिजली गिरने की घटनाओं में खुले स्थानों पर खड़े पेड़ सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं। ऐसे में बारिश और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचना चाहिए।
जनजीवन पर संभावित असर और सावधानी
भारी बारिश और तेज हवाओं से अक्सर यातायात, बिजली और इंटरनेट जैसी आवश्यक सेवाओं में बाधा आती है। ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल ही में जयपुर में इंटरनेट की गति बहाल होने से कारोबारियों और आमजन को मिली राहत यह दर्शाती है कि आपातकालीन परिस्थितियों में कनेक्टिविटी बनाए रखना कितना आवश्यक है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर ध्यान दें, अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। खुले में घूमने या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें, खासकर जब बिजली चमक रही हो।
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राज्य सरकारें और आपदा प्रबंधन टीमें संभावित बाढ़, जलभराव और वज्रपात की घटनाओं से निपटने के लिए तैयार हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों से किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की जा रही है। जुलाई महीने में सामान्य से कम बारिश का अनुमान होने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर अत्यधिक बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
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Disclaimer:यह समाचार लेख Google AI Studio की सहायता से तैयार किया गया है, लेकिन सटीकता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सांगरी टुडे की संपादकीय टीम द्वारा इसकी समीक्षा की गई है। अधिक जानकारी के लिए मूल स्रोतों के लिंक नीचे दिए गए हैं।
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