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आईआईएम संबलपुर के दिल्ली कैंपस में वर्किंग प्रोफेशनल्स के पहले एमबीए बैच की शुरुआत
Mamta Choudhary Verified Public Figure • 27 Mar, 2026Editor
अक्टूबर 10, 2023 • 1:54 PM 0
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शिक्षा
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“आईआईएम संबलपुर के दिल्ली कैंपस में वर्किंग प्रोफेशनल्स के पहले एमबीए बैच की शुरुआत”
आईआईएम संबलपुर के दिल्ली कैंपस में वर्किंग प्रोफेशनल्स के पहले एमबीए बैच की शुरुआत
नई दिल्ली -भारत के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में से एक आईआईएम संबलपुर ने दिल्ली में वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए अपने पहले एमबीए बैच का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया। यह आईआईएम संबलपुर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां कामकाजी पेशेवर और उद्यमियों का समूह अपनी-अपनी कारोबारी यात्रा जारी रखते हुए मैनेजमेंट एजुकेशन को जारी रख सकते हैं। कार्यक्रम की मुख्य विशेषता यह है कि यह फंक्शनल डोमेन के अलावा डेटा साइंस, प्रोडक्ट मैनेजमेंट, इनोवेशन और टार्टअप में विशेषज्ञता प्रदान करता है।
इस अवसर पर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज, नई दिल्ली के संयुक्त सचिव डॉ. आलोक कुमार मिश्रा ने इस बात की जानकारी दी कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में शुरू की गई क्रेडिट प्रणाली छात्रों को देश के भीतर और अन्य देशों के संस्थानों में भाग लेने की अनुमति देती है।
मुख्य वक्ता शतानीक गोस्वामी, लीड कंसल्टेंट, गूगल क्लाउड कंसल्टिंग ने आईआईएम संबलपुर के निदेशक प्रोफेसर महादेव जायसवाल को इस उपलब्धि पर बधाई दी और प्रोडक्ट मैनेजमेंट की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा की। उन्होंने स्टार्टअप के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों यानी व्यवसाय, रुचियों और अनुभव को आपस में जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी स्टार्टअप के तेजी से आगे बढ़ने के लिए इनमें से कम से कम दो स्तंभों का आपस में मिलना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि प्रोडक्ट मैनेजर का यह दायित्व भी है कि वह प्रोडक्ट को सस्टेनेबल और फायदेमंद बनाने के तरीके भी तलाश करे।
आईआईएम संबलपुर के निदेशक प्रोफेसर महादेव जायसवाल ने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि हाल के दौर में जैसे-जैसे उद्योग विकसित हो रहे हैं, उसी तरह मैनेजमेंट एजुकेशन की जरूरत भी विकसित हो रही है। आज जरूरत इस बात की है कि हम इनोवेशन पर आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दें। इस परिदृश्य को देखते हुए भारतीय बिजनेस स्कूलों में इनोवेशन और इंटीग्रेशन को बढ़ावा देने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में इन तथ्यों का देश की जीडीपी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हम शिक्षा में समावेशिता और लैंगिक विविधता की दिशा में काम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम छात्रों को डिजिटल टैक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन में नेतृत्व करने के लिए काबिल बनाते हुए उद्यमशीलता की मानसिकता को अपनाने और सामाजिक समस्याओं का समाधान बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।’’
इस अवसर पर प्रोफेसर राजीव टंडन, पूर्व सीईओ, एससी जॉनसन ने ‘प्रोडक्ट मैनेजमेंट इन द एरा ऑफ 4.0’ थीम पर एक महत्वपूर्ण प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने ब्रांड और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर बदलते दृष्टिकोण के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रोडक्ट पर किए गए निवेश पर रिटर्न को और बेहतर बनाने के लिए समर्पित, हाई फ्रीक्वेंसी यूजर्स पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति पर भी प्रकाश डाला। यह दृष्टिकोण सोशल मार्केटिंग पर व्यावसायिक उद्देश्यों को प्राथमिकता देता है और इसका उद्देश्य व्यापक रूप से स्वीकृत और लाभदायक प्रोडक्ट तैयार करना है।
इंडिया एक्सेलेरेटर के को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर दीपक शर्मा ने इनोवेशन-आधारित उद्यमिता के कॉन्सेप्ट पर चर्चा की, जिसमें कुशल निष्पादन के साथ कल्पनाशील सोच के फ्यूजन पर जोर दिया जाता है। उन्होंने आगे बताया कि इनोवेशन में विचारों का उत्पन्न होना, उन्हें अपनाना और उनका कारोबारी इस्तेमाल करना भी शामिल है, जबकि उद्यमिता में वैल्यू क्रिएट करने और सामाजिक मुद्दों का समाधान करने के लिए संसाधनों को अपनाने और हर स्थिति के लिए तैयार रहने पर जोर दिया जाता है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत एमबीए फॉर प्रोफेशनल्स की चेयरपर्सन प्रोफेसर पूनम कुमार ने की, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर एसएच राव ने किया। कार्यक्रम का संचालन अमृत मोहंती ने किया।
वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए आईआईएम संबलपुर के एमबीए के पहले बैच का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा बने श्री जी एम गुप्ता, जो एक उद्यमी हैं। वे 80 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और दिल्ली में एमबीए प्रोग्राम में शामिल हुए हैं। श्री गुप्ता ने उत्साहपूर्वक सीखने के प्रति अपने जुनून को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस कोर्स में शामिल होने से पहले उन्होंने अपनी पीएच डी की डिग्री भी पूरी कर ली थी। फिलहाल वह डिफेंस सेक्टर के एक स्टार्टअप के मालिक हैं जबकि उन्होंने डीसीएम श्रीराम में भी लंबे समय तक काम किया है। एक स्टार्टअप के प्रमुख होने के नाते उनका मानना है कि नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल करना, केस स्टडीज के माध्यम से ज्ञान, और सीखे गए पुराने नियमों को भुलाना उन्हें इसे और अधिक प्रभावी ढंग से मैनेज करने में सक्षम करेगा।