बढ़ते स्ट्रेस से 10-15% यूवा तेजी से हो रहे हैं इनफर्टिलिटी का शिकार

Pooja Padiyar
Pooja Padiyar Editor
जुलाई 21, 2022 • 1:36 PM  0
हेल्थ
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बढ़ते स्ट्रेस से 10-15% यूवा तेजी से हो रहे हैं इनफर्टिलिटी का शिकार
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बढ़ते स्ट्रेस से 10-15% यूवा तेजी से हो रहे हैं इनफर्टिलिटी का शिकार
बढ़ते स्ट्रेस से 10-15% यूवा तेजी से हो रहे हैं इनफर्टिलिटी का शिकार
आजकल की भागदौड़-भरी जीवन शैली से दुनियाभर के लोग इनफर्टिलिटी का शिकार हो रहे हैं। भारत में भी इन दिनों 10-15% युवाओं में फर्टिलिटी से जुड़ी बीमारी तेजी से फैल रही है। यह समस्या महिला ही नहीं पुरुष में भी तेजी से फैल रही हैं। एक मेडिकल शोध के मुताबिक हर समय हर 10 में से एक व्यक्ति बांझपन का शिकार हो रहा हैं। और यूवा में बढ़ती इनफर्टिलिटी की संख्या विदेशी देशों से कम जरुर हैं, लेकिन यह खतरनाक बात है। ऐसी कई इमोशनल हेल्‍थ कंडीशन हैं जो इनफर्टिलिटी का कारण बनती और इनमें स्ट्रेस भी शामिल है। 
आपके आंतरिक शरीर में स्ट्रेस का कारण कोई भी हो सकता है। स्ट्रेस से प्रॉ‍डक्टिविटी में कमी आ सकती है। 
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की फर्टिलिटी रेट 2015 से 2021 में 2.2 से 2.0 तक पहुंच गई है। आमतौर पर टेस्ट से पहले महिलाओं को ही इनफर्टिलिटी के लिए जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन कई मामलों में पुरुष भी जिम्मेदार होते है।
वैसे तो इसका कोई स्पष्ट कारण तो नहीं है, लेकिन ऐसा लगता है कि इसके लिए एक नहीं बल्कि कई जीवन शैली कारक शामिल होते है। कई डॉक्टर का मानना हैं की युवा पढ़ाई, करियर और सोशल कमिटमेंट के चक्कर में प्रेगनेंसी में देरी कर रहे हैं। जैसे कि किस उम्र में आप परिवार शुरू कर रहे है, पोषण, वजन, व्यायाम, तनाव और अन्य कारक प्रजनन क्षमता पर प्रभाव डाल सकते हैं। सभी जानते हैं कि फर्टिलिटी उम्र के साथ कम होती चली जाती है। वहीं पुरुषों में उम्र के साथ वीर्य की क्वालिटी भी गिरने लगती है। तो 25 साल से कम उम्र में कंसीव करना सबसे अच्छा रहता है।  
महिलाओं की बात करें इनफर्टिलिटी का कारण एंडोमेट्रियोसिस, फैलोपियन ट्यूब का ब्‍लॉक होना, हार्मोनल विकार, मासिक धर्म में अनियमितता, पेल्विक इंफेक्‍शन और पीसीओएस भी हो सकता है। वहीं पुरुषों में गलत खाने की आदत सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। जीवनशैली कारक की बात करें तो स्ट्रेस कम करने के लिए 
धूम्रपान, शराब और कैफीन का सेवन प्रजनन क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। साथ ही फोन, लैपटॉप, प्लास्टिक आदि शुक्राणु के दुश्मन हैं। साथ ही एंडोक्राइन- ग्रंथी को प्रभावित करते है। मार्केट में पाए जाने वाले प्लास्टिक, शैंपू और कीटनाशकों जैसे उत्पादों में एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकलस पाए जाते है। यह केमिकलस महिला और पुरुष प्रजनन विकास को बदल रहे हैं, जो मानव जाति को खतरे में डाल सकते हैं।
हमारे किचन में ही कुछ हर्बस और मसालें मौजूद हैं, जिससे इनफर्टिलिटी की समस्या को दूर कर सकते है। जैसे की अश्वगंधा जो एंडोक्राइन प्रणाली को ठीककर आपके प्रजनन प्रणाली को भी बूस्ट करता है। रसबरी के पत्तें का सेवना कर सकते है जो महिलाओं के डिस्टर्ब होर्मोन को ठीक करता है। 
साथ ही अपने डाइट में बदलाव करें जैसे कि जंक फूड की बजाय आप दिन में एक बार फल जरुर खाये, जितना हो सके पानी पीए, डाइट में फाइबर (फल, सब्जी, अनाज) को शामिल करें। अगर आप शाकाहारी हैं तो प्रोटिन के लिए आप सब्जी स्रोत में बीज या ड्राय फूट्स भी शामिल कर सकते हैं। खानपान के अलावा आप दिन में एक बार योगा जरुर करे जो फर्टिलिटी रेट को बूस्ट करने में मदद करता है। सोने से एक घंटे पहले कम से कम फोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करें। 
आयूर्वेद से भी इनफर्टिलिटी का इलाज बिना आपरेशन के हो सकता है। आयूर्वेद की मदद से पंचकर्म चिकित्सा से आपके शरीर को डिटॉक्सिफाय करके प्रजनन प्राणली में शुधार करता है। पंचकर्म ट्यूबल ब्लॉकेज, पीसीओडी, एंडोमेट्रियोसिस, खराब एंडोमेट्रियल रिसेप्टिविटी के उपचार के लिए उत्तर बस्ती, रक्तमोक्षण, विरेचन, वामन, नस्यम, बस्ती, स्नेहन जैसे उपचार किए जाते हैं। 
अगर आप इनफर्टिलिटी से पीड़ित हैं और नेचुरल ट्रीटमेंट से अपना इलाज करवाना चाहते है। तो दिल्ली के स्वश्रेत्र इनफर्टिलिटी क्लिनिक में संपर्क करें। आपके सब समस्या का समाधान आशा आयूर्वेद के पास मौजूद है।
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