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एमपीयूएटी के गोद लिए गाँव मदार मे सौर ऊर्जा पर प्रयोगिक चर्चा
Govind Chouhan Author
अप्रैल 23, 2022 • 6:27 PM 0
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उदयपुर
NEWS CARD
“एमपीयूएटी के गोद लिए गाँव मदार मे सौर ऊर्जा पर प्रयोगिक चर्चा”
दिनांक 23 अप्रैल 2022 : महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतरगर्त अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना कृषि एवं कृषि उद्योगों में ऊर्जा और कृषिरत महिलाओ की परियोजनाओं के संयुक्त तत्वाधान में गांव मदार एवं ब्राह्मणो की हुंदर में सौर ऊर्जा स्रोतों पर प्रशिक्षण आयोजीत किया गया जिसमे 80 महिलाओ को नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत जैसे कि सोलर कुकर, घरेलू प्रकाश प्रणाली, बायोगैस सयंत्र के महत्व एवं इसको उपयोग करने के तरीकों को विस्तार में प्रदर्शन एवं प्रायोगिक माध्यम द्वारा बताया गया।
प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. विशाखा बंसल ने महिलाओं को सोलर कुकर व घरेलू प्रकाश प्रणाली के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के अधिक उपयोग से प्रकृति के स्त्रोतों का हनन हुआ है इसीलिए आज की आवश्यकता है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाए।
डॉ. कीर्तिका शर्मा ने नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत की वैज्ञानिकी के बारे मे बताते हुए महिलाओं को विभिन्न सौर ऊर्जा चलित उपकरणों की प्रयोग विधि विस्तार पूर्वक बताई। डॉ. शर्मा ने किसान हित एवं बहुउपयोगी सोलर कुकर तकनीक के बारे मे वृस्तृत जानकारी देते हुए इसे पूरी तरह से इको फ्रेंडली बताया। सौर कुकर मे सुबह खाद्य सामाग्री रख कर इसे 2 से 3 घंटो मे आसानी से 3 से 4 व्यक्तियों का खाना पकाया जा सकता है।
यदि खाना पकने के बाद इसे बंद कर भी दिया जाये तो खाना 3 से 4 घंटो तक गरम ही रहता है। वर्तमान मे ऊर्जा के नवीकरणीय स्त्रोतों का घर घर प्रयोग कर सभी के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण आसानी से किए जा सकने की बात पर ज़ोर दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कपिल सामर ने घरेलू स्तर पर बहुउपयोगी सोलर होम लाइटिंग सिस्टम एवं बायोगैस तकनीकी के बारें में जानकारी दी। सोलर होम लाइटिंग सिस्टम को रात्रि के समय एक घर के दो कमरो एवं हाल मे एक साथ एलईडी बल्ब के माध्यम से आसानी से रोशनी की जा सकती है। इसके पोर्टेबल टॉर्च फीचर के माध्यम से रात्रिकालीन के समय खेत पर जाने हेतु रोशनी का सर्वश्रेष्ट स्त्रोत बताया। साथ ही सामर ने मदार के किसानों की पशुधन की क्षमता को देखते हुए किसानो के यहां 2 घन मीटर की क्षमता वाले बायोगैस सयंत्र स्थापित किये जा सकने का सुझाव दिया है जिसमे प्रतिदिन 4 से 6 पशुयों के गोबर की जरूरत होती है जिससे 7 से 8 सदस्यो के परिवार का सुबह शाम का खाना आसानी से बनाया जा सकता है।
साथ ही इस सयंत्र से स्लरी के रूप में जैविक खाद भी बनती है जिसका उपयोग खेती में किया जा सकता है। इस खाद से प्रतिवर्ष किसान को 20 प्रतिशत तक पैदावार में बढ़ोतरी होती है। बायोगैस सयंत्र से उत्पन्न गैस के रसोई घर मे उपयोग लेने से सालाना 7000 से 8000 की बचत होती है। सामर ने बताया कि 2 घन मीटर बायोगैस सयंत्र के निर्माण में लगभग 22000 रूपये का खर्चा आता है
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