कैदियों के पुनर्वास और कल्याण को नजरअंदाज करना समाज के लिए नुकसानदेह - अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

स्वयंसेवी संगठनों के साथ काम किया जा सकता है, जो पूर्व कैदियों के पुनर्वास में मदद करते हैं। पूर्व कैदियों को रोजगार देने के लिए नियोक्ताओं को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

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Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026 Editor
जून 20, 2024 • 4:57 PM  0
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कैदियों के पुनर्वास और कल्याण को नजरअंदाज करना समाज के लिए नुकसानदेह - अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)
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20 Jun 2024
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कैदियों के पुनर्वास और कल्याण को नजरअंदाज करना समाज के लिए नुकसानदेह - अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)
कैदियों के पुनर्वास और कल्याण को नजरअंदाज करना समाज के लिए नुकसानदेह - अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार भारतीय जेलों में 50 वर्ष से अधिक उम्र के 73 हजार से ज्यादा कैदी हैं। ऐसे  कैदियों की स्थिति और उनकी रिहाई के बाद का जीवन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर जेल प्रशासन और केंद्र सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आज के समय में, जब भारत सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो यह जरुरी हो जाता है कि हम अपने कैदी पुनर्वास प्रणाली की भी पुनः समीक्षा करें। जेल से बाहर निकलने के बाद इनका जीवन कैसा होता है, इस पर शायद कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। न तो जेल प्रशासन इनकी जानकारी रखता है और न ही केंद्र सरकार इनके पुनर्वास के लिए कोई ठोस नीतियां बनाती है। ऐसा मैं राजस्थान के जेल प्रशासन से मिले उत्तर के आधार पर कह सकता हूं कि शायद उन्हें इस बात की कोई परवाह भी नहीं है कि कैदी जेल से निकलने के बाद कैसी स्थिति में है। सोचने वाले बात है कि जिन कैदियों ने अपने जीवन के 20 -25 या यूं कहें जवानी का पूरा दौर जेल में बिता दिया है, उनसे इतना भी सरोकार नहीं रखा जा सकता कि उनके आगे के भविष्य के बारे में सोचा जाए।   

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