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उन्नीसवीं अनुसंधान परिषद की बैठक सम्पन्न
बैठक में विशेष आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. वी.एस. तोमर, पूर्व कुलपति, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर ने अन्य अतिथियों के साथ जैविक खेती ईकाई का भ्रमण किया व इकाई की उत्कृष्ट कार्य प्रणाली की भूरी भूरी प्रशंसा की।
Sangri Today Verified Media or Organization • 28 Mar, 2026Editor
उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के अनुसंधान परिषद की उन्नीसवीं बैठक गुरूवार को अनुसंधान निदेशालय में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
इस अवसर पर वैज्ञानिकों को सम्बोधित करते हुए एमपीयूएटी के कुलपति डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान में अग्रणी है। हमारे संस्थान ने नई किस्मों, गुणवŸाा अनुसंधान प्रपत्रों, पेटेन्टस एवं पुरस्कार व अवार्ड प्राप्त कर अपनी रैकिंग में अभूतपूर्व सुधार करते हुए प्रदेश में प्रथम व राष्ट्रभर में 15 वाँ स्थान प्राप्त किया है। माननीय कुलपति ने वैज्ञानिकों को अपने अनुसंधान कार्य को समय व स्टेक हॉल्डर की आवश्यकतानुसार सृजित करने को कहा जिससे समाज के हर तबके जैसे कि उत्पादक, विपणनकर्ता एवं उपभोक्ताओं को हमारे अनुसंधान लाभ प्राप्त हो सके।
उन्होंने कहा कि हमें हमारे अनुसंधान की योजना व्यापार की सम्भावनाओं को लक्ष्य बना कर करनी चाहिए। डॉ. राठौड़ नेे कहा कि अनुसंधान योजना राष्ट्रीय लक्ष्य को आधार बनाते हुए करनी चाहिए एवं हर अनुसंधान का परोक्ष व अपरोक्ष लाभ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचनाओं, प्रजातन्त्र, मांग आपूर्ति व कृषक जगत को सुदृढ़ करने में होना चाहिए। डॉ. राठौड़ ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान योजनाओं के निर्धारण हेतु चार सूत्रीय मंत्र दिया जिसमें नवीन सोच, नीति पूर्वक योजना, समाज व कृषकों से प्रासंगिकता व उचित निवेश सम्मिलित है।
बैठक में विशेष आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. वी.एस. तोमर, पूर्व कुलपति, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर ने अन्य अतिथियों के साथ जैविक खेती ईकाई का भ्रमण किया व इकाई की उत्कृष्ट कार्य प्रणाली की भूरी भूरी प्रशंसा की। डॉ. तोमर ने कहा कि विश्वविद्यालय को अपने अन्तर्गत क्षेत्र के विशिष्ट कृषि उत्पादों के विकास व मूल्य संवर्धन पर विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है जिससे क्षेत्र, उत्पाद के साथ साथ विश्वविद्यालय की ख्याति पूरे विश्व में बडे़गी। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को अपने अनुसंधान परिणामों को थ्च्व् व अन्य समुहों के माध्यम से प्रसारित करने चाहिए जिससे उन्हें शाश्वत रूप से समाज व कृषकों के मध्य सजीव रख सके। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय के हर फार्म पर प्रजनक बीज का ही उत्पादन करना चाहिए जिससे विश्वविद्यालय का राजस्व बढ़ेगा।
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बैठक में आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने अपने उद्बोदन में कहा कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख समस्या है जो अन्य फसलों के साथ- साथ उद्यानिकी फसलों, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन आदि को प्रभावित कर रही है। जलवायु परिवर्तन के लिए तापमान प्रबन्धन व मृदा में कार्बन स्तर में वृद्धि जैसे बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए। जल प्रबन्धन पर विशेष ध्यान आकर्षण की आवश्यकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि जल व उर्वरक के संरक्षण हेतु संसाधन उपयोग क्षमता बढ़ाने की आवश्कता है। उन्होंने कहा कि समेकित कृषि प्रणाली मॉडल अनाज फसल आधारित न होकर उद्यानिकी फसल व पशु पालन आधारित होने चाहिए जिससे कि कृषकों को अधिक आय प्राप्त हो सके। साथ ही उन्होंने फसल बुवाई से लेकर मूल्य संवर्धन तक यांत्रिकी-करण की महत्ती आवश्यकता बताया। उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली में उद्यानिकी फसलों, विदेशी फसलों मशरूम खेती को सम्मिलित करना चाहिए। और बाजार स्थिति को देखते हुए मशरूम खेती को वर्षभर करने की सलाह दी।
बैठक के प्रारम्भ में अनुसंधान निदेशक डॉ. शान्ति कुमार शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया एवं 16 मार्च, 2021 की विगत बैठक में लिये गये निर्णयों की अनुपालना रिपोर्ट एवं विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। कृषि अनुसंधान केन्द्र, उदयपुर कीे क्षैत्रीय निदेशक डॉ. रेखा व्यास, कृषि अनुसंधान केन्द्र, बाँसवाड़ा के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. डी.पी सैनी ने अपने क्षैत्र में किये जा रहे अनुसंधान कार्यो एवं परिणामों पर प्रस्तुतिकरण दिया।
बैठक में अनुसंधान निदेशालय द्वारा प्रकाशित ‘‘100 तकनीकी’’ का विमोचन किया गया। साथ ही ‘‘रिसर्च एण्ड डवलपमेन्ट एट ऐ ग्लान्स’’ एवं ‘‘कॉफी टेबल बुक’’ दो तकनीकी फोल्डर एवं दो मोबाईल एप्प का भी विमोचन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के निदेशक, सभी संघटक महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, क्षैत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्रों के निदेशक व कृषि विज्ञान केन्द्र, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विभाग राजस्थान सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।
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