धानुका एग्रीटेक ने तरबूज और खीरा फसल के लिए वैज्ञानिक समाधान सुझाए
अप्रैल–मई के दौरान जायद फसलें जैसे तरबूज और खीरा अपने बढ़वार और फल बनने के अहम चरण में होती हैं। इस समय तक अधिकतर किसानों ने बुवाई और पौधों ...
अप्रैल–मई के दौरान जायद फसलें जैसे तरबूज और खीरा अपने बढ़वार और फल बनने के अहम चरण में होती हैं। इस समय तक अधिकतर किसानों ने बुवाई और पौधों की स्थापना का काम पूरा कर लिया होता है। तरबूज और खीरा संवेदनशील और उच्च मूल्य वाली फसलें हैं, इसलिए सिंचाई, पोषण या कीट नियंत्रण में छोटी-सी गलती भी उत्पादन और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिये ये धानुका एग्रीटेक कुछ जरूरी वैज्ञानिक सुझाव देता है। बढ़ती गर्मी, हीटवेव, फफूंदी जनित रोग और कीटों का प्रकोप इस समय फसल के लिये बड़ा खतरा बनता है। अच्छी और लाभदायक पैदावार के लिये किसानों को सही तकनीकों को अपनाने और समय पर प्रबंधन करना जरूरी है। किसानों को अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी और स्वस्थ बीज का उपयोग करना चाहिए।