वाशिंगटन/तेहरान – मध्य पूर्व में एक महीने से अधिक समय से जारी तनावपूर्ण संघर्ष अब और भयावह रूप लेता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और आश्चर्यजनक फैसला लिया है। उन्होंने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना के प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को उनके पद से हटा दिया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच सीधा टकराव तेज हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने जनरल जॉर्ज की बर्खास्तगी को सैन्य अभियान के दौरान नेतृत्व में बदलाव बताया है, हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक इस कदम की कोई विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को बार-बार चेतावनी दी है कि अगर जरूरत पड़ी तो उसे ‘स्टोन एज’ में वापस भेज दिया जाएगा। हालिया बयानों में उन्होंने संकेत दिया है कि अगले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर और भी कड़े प्रहार किए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान अपने लक्ष्यों के करीब पहुंच चुका है।
लेकिन ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई पूरी ताकत के साथ जारी है। अमेरिकी दावों के बावजूद कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो गई है, तेहरान ने इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाते हुए हमलों का दावा किया है।
IRGC ने बताया कि उसने बहरीन में अमेज़न के क्लाउड कंप्यूटिंग सेंटर और दुबई में ओरेकल के डेटा सेंटर पर सफल हमले किए हैं। ये हमले संघर्ष को अब सैन्य क्षेत्र से आगे बढ़ाकर डिजिटल और आर्थिक बुनियादी ढांचे तक ले जाने का संकेत देते हैं।
बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास ने आपातकालीन अलर्ट जारी कर अपने नागरिकों से तुरंत इराक छोड़ने की अपील की है। दूतावास ने चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों के अंदर ईरान समर्थित मिलिशिया समूह अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं।
इजरायल की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान ने मात्र छह घंटे के भीतर मिसाइल हमलों की कम से कम चार लहरें दागीं। इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें देश के मध्य क्षेत्रों में गिरने में सफल रहीं, जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ है। इजरायली अधिकारियों ने इसे हाल के हफ्तों का सबसे तीव्र हमला बताया है।
इस बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित हुई तो ऊर्जा की कीमतें और भी आसमान छू सकती हैं। यह जलडमरूमध्य दुनिया के अधिकांश कच्चे तेल का परिवहन करता है, इसलिए यहां की कोई भी अशांति पूरी दुनिया को प्रभावित करती है।
ट्रंप के इस फैसले ने पेंटागन और सहयोगी देशों में चर्चा छेड़ दी है। सक्रिय सैन्य अभियान के दौरान शीर्ष नेतृत्व में बदलाव कमांड की निरंतरता को प्रभावित कर सकता है, ऐसा कई सैन्य विश्लेषकों का मानना है।
मध्य पूर्व के आम नागरिक अब सायरनों और अलर्ट की छाया में जी रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र की कंपनियां डिजिटल सेवाओं में अचानक आई रुकावट से परेशान हैं। वहीं, वैश्विक बाजार तेल की कीमतों में उछाल से जूझ रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन इस अभियान को ईरान और उसके प्रॉक्सी समूहों से पैदा होने वाले खतरे को खत्म करने के लिए जरूरी बता रहा है। लेकिन ईरान की ओर से लगातार हो रहे मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाइयों को देखते हुए शांति की राह अभी दूर नजर आ रही है।