मुख्य बातें
- मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल (MESC) ने दिल्ली में 'ऑरेंज इकोनॉमी' के भविष्य को आकार देने के लिए IFFD 2026 में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।
- इस आयोजन में उद्योग जगत के शीर्ष नेताओं, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने रचनात्मक क्षेत्रों के विकास पर गहन विचार-विमर्श किया।
- यह पहल मीडिया, मनोरंजन, कला, डिजाइन और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास, नवाचार और रोजगार सृजन पर केंद्रित है।
दिल्ली में ऑरेंज इकोनॉमी के भविष्य पर मंथन: MESC की अहम पहल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऑरेंज इकोनॉमी के भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल (MESC) ने इंडिया फैशन फोरम दिल्ली (IFFD) 2026 में उद्योग जगत के दिग्गजों को एक मंच पर लाया। इस रणनीतिक बैठक का मुख्य लक्ष्य भारत के रचनात्मक और सांस्कृतिक उद्योगों की अपार संभावनाओं को पहचानना और उन्हें विकसित करना है।
IFFD 2026 एक ऐसा महत्वपूर्ण अवसर बना जहाँ रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा की गई। इसमें फिल्म, टेलीविजन, एनीमेशन, गेमिंग, संगीत, कला, फैशन और डिजिटल सामग्री जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान इन क्षेत्रों के सामने आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर विशेष ध्यान दिया गया।
रचनात्मक उद्योगों को नई दिशा
ऑरेंज इकोनॉमी से तात्पर्य उन आर्थिक गतिविधियों से है जो मानव रचनात्मकता, कलात्मकता और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित होती हैं। इसमें मीडिया, मनोरंजन, डिजाइन, फैशन, वास्तुकला, प्रकाशन और सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्र आते हैं। भारत, विशेषकर दिल्ली, में इन क्षेत्रों के विकास की विशाल क्षमता है, जो देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।
बैठक में उपस्थित उद्योग लीडर्स ने इस बात पर जोर दिया कि रचनात्मक क्षेत्रों को पारंपरिक आर्थिक मॉडल से हटकर देखने की जरूरत है। ये क्षेत्र केवल कला और संस्कृति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक विकास के शक्तिशाली इंजन बन सकते हैं। इन उद्योगों को सही समर्थन और नीतिगत ढांचे के साथ वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।
कौशल विकास और नवाचार पर जोर
MESC की पहल का एक प्रमुख बिंदु रचनात्मक उद्योगों में कौशल अंतर को पाटना और नवाचार को बढ़ावा देना है। चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि उभरती प्रौद्योगिकियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाना ऑरेंज इकोनॉमी के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए नई पीढ़ी को आवश्यक कौशल से लैस करना अनिवार्य है।
इस संदर्भ में, उद्यमिता को बढ़ावा देने और नए स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया गया। जिस प्रकार फार्मासिस्ट की नौकरी से मालिकाना सोच तक – SOS जनहित मेडिकल का अगला कदम उद्यमिता का एक सफल उदाहरण प्रस्तुत करता है, उसी तरह रचनात्मक क्षेत्रों में भी छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों को फलने-फूलने का अवसर मिलना चाहिए।
नीतिगत सुधार और निवेश के अवसर
उद्योग के नेताओं ने ऑरेंज इकोनॉमी के विकास के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसमें कॉपीराइट संरक्षण, वित्तीय प्रोत्साहन और नियामक ढांचे को सरल बनाना शामिल है। ऐसी नीतियां निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं और रचनात्मक परियोजनाओं के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध करा सकती हैं।
यह पहल ऐसे समय में की गई है जब देश के विभिन्न राज्य आर्थिक विकास के लिए विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जिस तरह राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026 ने एक नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए मार्ग प्रशस्त किया है, उसी तरह दिल्ली में ऑरेंज इकोनॉमी के लिए भी विशेष नीतियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसका उद्देश्य दिल्ली को रचनात्मक उद्योगों का एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
भविष्य की रणनीति और प्रभाव
इस बैठक में तैयार की गई रणनीतियां ऑरेंज इकोनॉमी के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। MESC और उद्योग जगत के बीच यह सहयोग कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करेगा, नवाचार को बढ़ावा देगा और दिल्ली में रचनात्मक उद्यमियों और पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोलेगा। उम्मीद है कि यह पहल भारत को वैश्विक रचनात्मक मंच पर एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।