Key Highlights

  • जयपुर के जवाहर कला केंद्र (जेकेके) का 33वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ।
  • 'संगीत, सुर और संस्कार' की विशेष थीम पर आधारित कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
  • बाल कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सबका ध्यान खींचा और खूब वाहवाही लूटी।

जयपुर। कला और संस्कृति के पर्याय जवाहर कला केंद्र (जेकेके) ने अपने 33वें स्थापना दिवस का भव्य समापन किया। 'संगीत, सुर और संस्कार' की त्रिवेणी से सराबोर यह आयोजन शहर के कला प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा। इस मौके पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें बाल कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया।

समारोह का मुख्य आकर्षण बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों रही, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज और मनमोहक नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया। नन्हें मुन्नों ने शास्त्रीय संगीत से लेकर लोक धुनों तक, हर विधा में अपनी कला का जादू बिखेरा। उनकी सहजता और समर्पण ने हर किसी को प्रभावित किया और उन्हें खूब सराहना मिली।

इस अवसर पर जेकेके परिसर में एक उत्सव का माहौल था। उपस्थित जनसमूह ने हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कला केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उन्हें कला के प्रति प्रेरित करना था।

जेकेके ने पिछले तैंतीस वर्षों से राजस्थान की कला और संस्कृति को एक मजबूत मंच प्रदान किया है। यह केंद्र विभिन्न कला रूपों को बढ़ावा देने और नए कलाकारों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस स्थापना दिवस समारोह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी सशक्त जरिया है।

इस तरह के आयोजन न केवल कला को बढ़ावा देते हैं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को एक मंच भी प्रदान करते हैं। देश और प्रदेश में ऐसी कई पहलें चल रही हैं जो विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं का सम्मान करती हैं और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। जेकेके का यह समारोह भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बच्चों में छिपी कला को निखारने का काम कर रहा है।

स्थापना दिवस के इन रंगारंग कार्यक्रमों ने एक बार फिर यह दर्शाया कि कला में कितनी शक्ति है। यह लोगों को एकजुट करती है और उन्हें अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व महसूस कराती है। जेकेके आने वाले वर्षों में भी कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।