Key Highlights

  • हरियाणा से बारात लेकर भरतपुर पहुंचे नाबालिग दूल्हे को दुल्हन ने दिया झटका, मौके से हुई फरार।
  • दूल्हे ने पहले शादी करने से मना किया था, लेकिन भाइयों के समझाने पर वह राजी हुआ।
  • दोनों परिवारों के बीच तनाव का माहौल, मामले को सुलझाने के लिए अब पंचायत का सहारा।
  • कल गांव में एक बड़ी पंचायत बुलाई गई है, जहां शादी के भविष्य पर अहम फैसला लिया जाएगा।

राजस्थान के भरतपुर जिले में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति बन गई, जब हरियाणा से बारात लेकर पहुंचे एक नाबालिग दूल्हे की दुल्हन शादी से ठीक पहले घर से फरार हो गई। यह घटना स्थानीय लोगों और दोनों परिवारों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि दूल्हा अभी नाबालिग है और उसने पहले इस शादी के लिए मना कर दिया था, लेकिन उसके भाइयों ने उसे समझा-बुझाकर राजी कर लिया था।

जानकारी के अनुसार, हरियाणा से बारात निर्धारित समय पर भरतपुर पहुंची। शादी की सभी रस्में शुरू होने की तैयारियां चल रही थीं और घर में उत्सव का माहौल था। मेहमानों का जमावड़ा लगा हुआ था और हर कोई खुशी में डूबा हुआ था।

बारात पहुंची, दुल्हन गायब

जैसे ही शादी की मुख्य रस्मों का वक्त करीब आया, दुल्हन अपने घर से अचानक गायब हो गई। परिजनों ने जब उसे तलाश करना शुरू किया तो वह कहीं नहीं मिली। दुल्हन के गायब होने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। दूल्हा पक्ष और वधू पक्ष, दोनों तरफ तनाव का माहौल बन गया।

दूल्हे के परिजनों ने बताया कि उनका बेटा अभी नाबालिग है और वह इस शादी के लिए राजी नहीं था। भाइयों और अन्य रिश्तेदारों ने उसे काफी समझाया, जिसके बाद वह शादी के लिए तैयार हुआ था। लेकिन अब दुल्हन के फरार होने से स्थिति और भी जटिल हो गई है।

💡 Did You Know? भारत में बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। कानूनी रूप से लड़के के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की के लिए 18 साल निर्धारित है। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत ऐसे विवाहों को शून्य घोषित किया जा सकता है और इसमें शामिल लोगों को दंडित भी किया जा सकता है।

दोनों पक्षों के लोग अब इस मामले को सुलझाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। परिजनों और रिश्तेदारों के बीच घंटों चली बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इसके बाद, अब यह तय किया गया है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए गांव में एक बड़ी पंचायत बुलाई जाएगी।

पंचायत में होगा फैसला

कल यानी मंगलवार को स्थानीय पंचायत इस पूरे मामले पर विचार करेगी। पंचायत में दोनों पक्षों के लोगों, स्थानीय बुजुर्गों और समाज के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शादी के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा। इस तरह के सामाजिक मुद्दों में, पंचायतें अक्सर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जैसा कि हमने देखा है कि कैसे विभिन्न समुदाय अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं। उदाहरण के लिए, निशाद समुदाय ने 13वाँ संकल्प दिवस मनाया, जो उनके सशक्तिकरण और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम था।

फिलहाल, बारात बिना दुल्हन के वापस लौटती है या पंचायत कोई और समाधान निकालती है, यह देखना बाकी है। इस घटना ने एक बार फिर बाल विवाह जैसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। इस घटना से जुड़े और अधिक अपडेट्स के लिए, सांगरी टुडे न्यूज़ पर बने रहें।