ओरण की रक्षा के लिए 60 किमी पैदल यात्रा

जैसलमेर - जिले की फतेहगढ़ तहसील के रासला-सांवता गांवों में निवासरत वन्यजीव प्रेमियों ने आज देगराय मंदिर से जैसलमेर जिला मुख्यालय तक 60 किलोमीटर की पैदल यात्रा आरम्भ की। निजी कंपनियों को ओरण की भूमि आवंटन के विरोध के चलते वन्यजीव प्रेमियों का विरोध लम्बे समय से हो रहा है। जैसलमेर के रासला सांवता गांव के पास स्थित प्राचीन शक्तिपीठ देगराय मंदिर की 600 साल से ज्यादा पुरानी विशाल ओरण स्थित है। इस ओरण के इलाकों को विभिन्न ऊर्जा कंपनियों को देने, ओरण के छूटे हिस्सों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने, वहाँ चल रहे काम के चलते पेड़ों को काटने से नष्ट होते प्राचीन पर्यावरण, बिजली लाइनों को बिछाने से राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण और भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर समेत सैंकड़ो पक्षियों के मरने की घटनाओं के चलते समय-समय पर प्रशासन को देने के बावजूद इस क्षेत्र के प्रति प्रशासन द्वारा सचेत नहीं होने पर ग्रामीणों द्वारा देगराय मंदिर से पदयात्रा करते हुए जिला मुख्यालय पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में अप्रैल 2021 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संपूर्ण ओरण को महत्वपूर्ण गोडावण विचरण क्षेत्र के रूप में स्वीकार करने के बावजूद प्रशासन द्वारा विभिन्न ऊर्जा कंपनियों के चल रहे कार्यों को रोकने की कार्रवाई नहीं करने से ग्रामीणों में रोष गहरा गया है। 16 जून को देगराय मंदिर से देवी भक्त, ओरण पर निर्भर पशुपालकों, पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक युवाओं द्वारा आज करीब 60 किलोमीटर तक पदयात्रा रवाना हुई है जो जैसलमेर जिला मुख्यालय पहुचेगी व प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। ओरण ज़मीनों पर निजी सोलर व विंड कम्पनियों द्वारा हाईटेंशन तारें लगाई गई हैं। इन तारों से आए दिन कई वन्यजीवों और राज्यपक्षी गोडावण ने अपनी जानें गंवाई है। लम्बे समय से वन्यजीव प्रेमी इस इस इलाके में इन तारों का विरोध कर रहे हैं और आज जो पैदल यात्रा निकाली गई है उनका उद्देश्य है कि इन ग्रीन एनर्जी के चक्कर में हम गोचर की भूमि, जीव व वन्यजीवों को खत्म कर रहे हैं।

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