जोड़ों को अपाहिज बना देने वाले आर्थराइटिस से पीडित कम उम्र के मरीजों में प्रत्यारोपण करना भी आसान

जोड़ों को अपाहिज बना देने वाले आर्थराइटिस से पीडित कम उम्र के मरीजों में प्रत्यारोपण करना भी आसान 

डा.संजय अग्रवाल

हेड र्थोपेडिक्स

पी.डी.हिंदुजा नेशनल अस्पताल, मुबंई

अभी तक आम तौर पर घुटने एवं हिप के जोड़ों का ही प्रतिस्थापन होता था, लेकिन अब कंधे, कोहनी, कलाई, अंगुली और टखने के जोड़ों को भी बदला जाने लगा है। एशियाई लोगों की हड्डियां न सिर्फ छोटी होती हैं, बल्कि यूरोपीय एवं अमेरिकी लोगों की तुलना में अधिक कमजोर भी होती हैं। इस नई खोज के परिणामस्परूप बेहतर जोड़ तैयार हुए जो कि मूल जोड़ के उच्च विकल्प थे और उनका जीवन भी 20-25 वर्ष बढ़ गया। प्रतिस्थापित जोड़ों के डिजाइन एवं उसकी निर्माण सामग्री में बेहतरी की वजह से जोड़ों की जीवन अवधि बढ़ गई है। धातु पर धातु,सेरेमिक पर सेरेमिक जैसे कुछ नये पहलुओं के उभरने और क्रांस लिक्ड पोली एथिलीन के विकास की वजह से घिसने की दर में कमी और एक बेहतर निम्र घर्षण कृत्रिम जोड़ का निर्माण हुआ तथा जोड़ों की जीवन अवधि बढ़ी। इस तरह इन जोड़ों को अपाहिज बना देने वाले आर्थराइटिस से पीडित कम उम्र के मरीजों में प्रत्यारोपण करना भी आसान हो गया है।

समकालीन टोटल नी रिप्लेसमेंट(टी के आर)जो कि वर्तमान में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली ऑर्थोपेडिक शल्य चिकित्सा है। हालांकि टी के आर का लक्ष्य सरल है, लेकिन उसे पूरा करने का साधन जटिल है और शल्य चिकित्सकों तथा अभियंताओं को मानवीय जोड़ों जैसे अंग तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। प्रक्रिया की सफलता न सिर्फ सर्जन और उसकी टीम की कार्य कुशलता पर निर्भर करती है, बल्कि तैयार किए गए जोड़ की डिजाइन तथा संयंत्रों से भी उसका संबंध है। दरअसल एक वैज्ञानिक रूप से ठीक डिजाइन के साथ आसानी से इस्तेमाल होने वाले संयंत्रों एवं तकनीकों का होना भी जरूरी है, जिसकी वजह से सटीकता तथा फिर से पहले जैसा होने की क्षमता आती है।

आर्थोपेडिक सर्जरी में घुटने की शल्य चिकित्सा को लेकर एक और महत्वपूर्ण विकास हुआ है जिसे यूनी-कमपार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट कहते हैं। जुड़ाई की बेहतर तकनीकों की वजह से इस सर्जरी में स्वास्थ्य लाभ तेजी से तथा दर्द रहित होता है। यह सर्जरी युवा पीढ़ी के लिए अधिक उपयोगी है, क्यों कि अब सर्जरी जोडने वाले पदार्थों के इस्तेमाल के बगैर की जाने लगी है। स्क्रू तथा दूसरे प्रेस फिट तरीकों की वजह से आगे प्रतिस्थापन तथा समायोजन कम परेशानी एवं बिना दर्द के साथ होता है। नितंब प्रतिस्थापन सर्जरी के मामले में हाइब्रिड हिप रिप्लेसमेंट तकनीक बेहतर सफलता दर के साथ प्रचलित हो रही है। युवा पीढ़ी उच्च सफलता दर प्रदर्शित कर रही है। यहां नितंब जोड़ कप बगैर सीमेंट के स्क्रू द्वारा फिट कर दिया जाता है। वास्तव में इस तकनीक ने जोड़ों की उम्र बढ़ाई है और सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ की अवधि को कम किया है। आर्थराइटिस से पीडित युवा मरीज(रियूमैटॉयड आर्थराइटिस,एंकीलूजिम स्पोन्डि-लाइटिस,ए बी एस वगैरह)अपने कृत्रिम जोड़ों की सीमित आयु की वजह से शल्य चिकित्सकों के लिए चुनौती बनकर सामने आते हैं क्यों कि उन्हें जीवन के बाद के दौर में फिर सर्जरी की जरूरत पड़ती है। अब नवीनतम वियरिंग सरफेज आर्थराइटिस के युवा मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। क्यों कि इनसे उन्हें अपनी नितंब समस्याओं का दीर्घकालीन समाधान हासिल हो रहा है.

भारत में ज्वाएंट रिप्लेसमेंट सर्जरी का भविष्य उज्जवल है। पिछले कुछ समय में भारत में होने वाली इस तरह की सर्जरी की संख्या में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है। टोटल ज्वाएंट रिप्लेसमेंट यहां भी उसी तरह से लोकप्रिय बनी रहेगी, जिस तरह से पिछले तीन दशकों के दौरान अच्छे परिणाम देकर दुनिया भर में अपने को साबित किया है। बदले जाने वाले अंगों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्रियों तथा उनके डिजाइनों को और अधिक बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर शोध कार्य चल रहे हैं, ताकि वे जितना संभव हो सके उतनी सुगमता एवं सामान्य ढंग से काम कर सकें। आने वाले समय में और अधिक प्रतिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता एवं प्रोसथेसिस की कम दर टी जे आर के इलाज के बहुत ही लोकप्रिय विकल्प के रूप में स्थापित होगी।




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