अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष रिपोर्ट: सुनीता की कहानी खुद उनकी जुबानी

@पूरण सिंह सोढ़ा

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आज एक ऐसी महिला से आपको रूबरू करवा रहे है जो हम सभी के लिए एक मिसाल है। जिसके जज्बे से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी हार गई, संगीत को अपना जीवन बना कर उसने इस घातक बीमारी को भी पटखनी देदी, हम बात कर रहे है बाड़मेर की बेटी व वर्तमान में जैसलमेर पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत सुनीता चौधरी की जिसने अपने आत्मविश्वास से कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी औंधे मुँह गिरा दिया, किसान के घर जन्मी सुनीता बचपन से ही अभाव भरी जिंदगी में अपना बचपन गुजरने के बाद भी आज इस मुकाम तक पहुंच गई है जो हर किसी के लिए सम्भव नही होता, मौत को इतने करीब से देखने के बाद अब सुनीता लोगो को जीवन के प्रति जागरूक करने में दिन रात लगी रहती है अपनी ड्यूटी का निर्वाहन करते हुवे सुनीता कई सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से व अपने संगीत के माध्यम से लोगो को इस मनुष्य जीवन की परिभाषा समझा रही है, इस अनमोल मनुष्य जीवन से कैसे खुद का व अपने से जुड़े लोगों का ध्यान रखा जाए, कैसे उन्हें स्वस्थ रखा जाए उसके लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे जनजागरण के विभिन्न माध्यमों से प्रचार प्रसार करने में जुटी है। सुनीता को इसके लिए कई अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है



सुनीता की कहानी खुद उनकी जुबानी

मैं सुनिता बाङमेर जिले के बायतु ब्लॉक की एक ढाणी में रहने वाली  एक किसान परिवार की बेटी हूँ। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढाई के साथ माता-पिता के साथ खेती का  काम भी करती थी और मात्र 3 साल की उम्र में मेरा बाल विवाह कर दिया जो कि मेरे लिए एक खेल समान था। पढाई में होशियार होने के कारण हमेशा अपने विघालय में अव्वल रही और सरकार ने मुझे गार्गी  पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। बाहरवीं कक्षा विज्ञान वर्ग से प्रथम श्रेणी उर्त्तीण होने के पश्चात मेरा चयन नर्स ग्रेड सेंकण्ड में चयन हुआ और एक वर्ष पश्चात मेरा चयन राज. पुलिस जैसलमेर में कानिस्टेबल के पद पर हो गया। घर में खुशियों के इस दौर में भी दुख ने पीछा नहीं छोङा। नौकरी के मात्र दो साल बाद मुझे एक गंभीर बीमारी कैंसर ने जकङ लिया लेकिन मैनें हिम्मत नहीं हारी और ऑपरेशन करवाकर किमो थैरेपी लगवायी जिससे मैं बहुत कमजोर हो गयी लेकिन "दवा और दुआ" पुलिस विभाग का सहयोग परिवार और लोगों की दुआओं  से स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। किमोथैरेपी के कारण सिर के बाल उङ गये लोग गंजी-गंजी कह कर चिढाते थे मगर मैनें हिम्मत नहीं हारी।

इस बीच मैनें खुद को संगीत की तरफ मोङा डॉ. बंशीधर तातेङ व रजनीकांत शर्मा गुरुजनों ने संगीत, हारमोनियम बजाना सीखा। संगीत के कारण मानसिक रुप से मजबूत हुई और हिम्मत पर चार चाँद लगने लगे।

मैनें पुलिस ड्यूटी के साथ-साथ भारत व राजस्थान सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित अपने स्वयं के खर्चें से गीत गाकर व वीडियों बनाकर जैसे- सङक सुरक्षा जीवन रक्षा, बेटी बचाओ बेटी पढाओं, स्वच्छ भारत मिशन अभियान, जल संरक्षण, मतदाता जागरूकता,   नशामुक्ति और कोरोना काल में ड्यूटी के साथ-साथ कोरोना जागरुकता गीतों को गाकर सोशल मीडिया के माध्यम से और जागरूकता रैलियों में लोगों को जागरुक करने का प्रयास किया। कोरोना जनजागरूकता वीडियो सीडी का विमोचन माननीय मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार द्वारा किया जाकर मेरी सराहना की। महामहिम राज्यपाल श्रीमान सत्यपाल मलिक सर ने भी जनजागरूकता कामों की सराहना कर सम्मानित किया।इस कार्य के लिए मुझे पुलिस महानिदेशक श्रीमान भूपेंद्र जी यादव सर ने प्रंशसा-पत्र कर सराहना की। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन जैसलमेर, बाङमेर एवं कई संस्थाओं द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसमें मेरे पुलिस प्रशासन का बहुत का बहुत सहयोग रहा  अभी पुलिस अधीक्षक श्रीमान अजयसिंह जी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमान राकेश जी बैरवा सर का हमेशा सहयोग मिल रहा है।

इन सबके साथ ड्यूटी करने के पश्चात विघालय में जाकर बच्चों को निःशुल्क पढाने के साथ-साथ बालिका शिक्षा , गुड टच बेड टच, सङक सुरक्षा, बाल अत्याचार एवं सरकारी हेल्पलाइन नम्बर जैसे- 100, 1098,108,1091 आदि की जानकारी देकर अपने अधिकारों के प्रति जागरुक करने का अथक प्रयास किया।

हाल ही में मैंने ट्रेक्टर ट्रोलियों द्वारा हो रही सङक दुर्घटनाओं को देखते हुए करीब 1000 ट्रेक्टरों पर रिफ्लेक्टर व रेडियम पट्टियां लगायी और लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

   सुनिता चौधरी
 राज. पुलिस जैसलमेर

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