कवि दिनेश बावरा के साथ ख़ास बातचीत: कविता के सफर की शुरुआत कैसे हुई?

मेरा जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ परंतु बाबूजी नौकरी मुंबई में करते थे तो कक्षा आठवीं में मैं भी मुंबई आ गया क्योंकि उत्तर प्रदेश का रहने वाला था तो यह स्वाभाविक था कि हिंदी मीडियम स्कूल में एडमिशन होना था और क्लास नाइंथ में एडमिशन हो गया। मैंने टीचर विलास वैद्य की प्रेरणा से कविता लिखना शुरू किया और फिर कक्षा 10th में मैंने पहली बार कविता पठन प्रतियोगिता में भाग लिया और यह प्रतियोगिता ही कविता की राह पर मेरा पहला कदम था।

अगर आपका पहला कदम ये था तो फिर दूसरा कदम क्या था?

मैं दसवीं में फेल हो गया था और परिणाम स्वरूप मेरे अंदर से पढ़ने की रुचि खत्म हो गई क्योंकि फेल होने की बेज्जती को मैं सहन नहीं कर पाया था, तो बाबू जी ने मुझे कोरियर सर्विस में नौकरी पर लगवा दिया लेकिन कुछ दिन काम करने के बाद मैंने खुद की एक छोटी सी पान की टपरी खोली और उसे अच्छे से चलाने की कोशिश की लेकिन मैं उसमें भी असफल हो गया। लेकिन मां और बाबू जी चाहते थे कि मैं दसवीं पास करूं तो दूसरे प्रयास में मैंने दसवीं पास कर ली, दसवीं पास होने के बाद मेरी शादी हो गई और मैंने पढ़ाई जारी रखते हुए 11वीं में एडमिशन ले लिया और फिर 12वीं भी कर ली। जब मैं कॉलेज में पहुंचा तो मेरी कविता में रूचि बेहद काम आने लगी, हिंदी शिक्षिका त्रिवेदी मैडम ने मुझे एक प्रतियोगिता में भेजा और मैं वहां विजेता घोषित हो गया और फिर उसके बाद से कविता वो कवि सम्मेलन के लिए मेरी जद्दोजहद चालू हो गई।

आपका टीवी में कैरियर कैसे शुरू हुआ?

टीवी के सफर की शुरुआत कुछ यूं हुई कि लाफ्टर चैलेंज फर्स्ट आ चुका था दूसरा भी आ चुका था लेकिन तीसरे सीजन में कलाकारों की कमी शुरू हो चुकी तो उन्होंने कवियों को मौका देना शुरू किया क्योंकि मैं भी एक हास्य कवि था तो मेरा भी नाम तीसरे सीजन में आ गया परंतु मेरा चयन अंतिम समय में हुआ और वह एपिसोड हिट हो गया और फिर वही से मेरे टीवी करियर की शुरुआत हुई और यही मेरी जर्नी का टर्निंग प्वाइंट भी था जिसने मुझे एक कवि से एक एक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।

एक कवि से एक्टर बनने तक की जर्नी कैसी रही?

मेरी कविताओं की प्रस्तुतियों में बहुत नाटकीयता होती थी और वह लोगों को दिखती भी थी इसलिए अक्सर लोग मुझे प्रोत्साहित करने लगे और लोगों के प्रोत्साहन ने मुझे एक्टिंग की ओर आगे बढ़ाया और फिर मुझे "सावधान इंडिया में एक लीड रोल ऑफर हुआ" मैंने वह कर दिया फिर मुझे एक फिल्म ऑफर हुई "हंड्रेड बक्स आई विल लीड" मैंने उसमें भी काम किया और इससे पहले भी छोटे-मोटे काम मैंने किए परंतु वह कोई मायने नहीं रखते थे लेकिन इन सब के बाद मुझे एक एक्टर के तौर पर थोड़ी सी पहचान मिलनी शुरू हो गई और आज यह बहुत अहम बात है कि लोग मुझे सुनना और देखना पसंद करते हैं।

दिनेश बावरा , कवि



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