आर डी बर्मन पुरूस्कार पाना मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण पर: नीति मोहन

मूंबई। सिंगर नीति मोहन सबसे पहले तब स्पॉट की गई जब वो आसमां बैंड का पार्ट बनने के लिए सलैक्ट की गई।मगर इस खुबसूरत व आकर्षक सिंगर का सफर बहुत लम्बा है।निति मोहन नें उन भाषाओं का भी गाना गा चुकी है जिन भाषाओं को वह जानती तक नहीं है। नीति मोहन का कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है।वो दिल्ली की एक साधारण फैमिली से कनैक्टेड है।वह मुख्यत रूप से हिन्दी फिल्म्स में गाती है मगर वो तमिल,तेलुगू,कन्नड,बंगाली,मराठी, पंजाबी वो इंग्लिश भाषा में भी गाना गा चुकी है।

वह चैनल वी के रियलिटी शो पॉपस्टार की विनर रह चुकी है।मगर उन्हें फिल्म स्टुडेंट आफ ईयर के गाने'इश्क़ वाला लव' ने शोहरत दिलाई।और अन्ततः 'जब तक है जान'में अनुष्का शर्मा पर फिल्माए गाने 'जिया रे' के लिए उन्हें 2012 में न्यू म्यूजिक टैलेंट का अवार्ड जीता। अमित त्रिवेदी के एलबम बॉम्बे वेलवेट के सिक्स जेज ट्रेक के लिए उन्हें म्यूजिक क्रिटिक्स सेन पॉजिटिव रेस्पोंस मिला।2016 में उनको एलबम बार बार देखो के सांग 'सौ आसमानों में' के लिए फिल्म फेयर अवार्ड के लिए नोमिनेट किया गया।इसी साल सिंगर नीति मोहन वॉइस इंडिया किड्स और वॉइस इंडिया के सैकंड सीजन के लिए जज चुना गया।

नीति मोहन के गाए पॉपुलर गानेंं तुुनेे मरी एंट्रियां(गुंडे), इंडिया वाले(हैप्पी न्यू ईयर) ,बैंग-बैंग टाइटल ट्रैक, इश्क वाला लव(स्टुडेंट ऑफ द ईयर),जिया रे(जब तक है जान),साड़ी गली आजा(नौटंकी साला),नैनोवाले नें(पद्मावत),तुझे अपना बनाने की(हेट स्टोरी 3)आदि है।

साथ ही साथ वह काफी चैरेटीज वह सामाजिक कार्यों में भी इनवोल्व रहती हैं।

प्रस्तुत हैं‌ उनसे ये खास मुलाकात-

आपकी तीन बड़ी बहनें हैं और आप सबसे छोटी हो।और सभी आर्टस फिल्ड में इन्टरेस्टेड थी।तो हमें ये बताइए कि म्यूजिक की तरफ आपका रूझान कैसे शुरू हुआ।कब आपको ऐसा लगा कि आपको इस लाइन में जाना चाहिए और परफोर्म करना चाहिए।आपकी क्या उम्र थी और आपकी म्यूजिकल जर्नी कैसे शुरू हुई ?

मेरा जन्म दिल्ली में हुआ और जब मैं फस्ट स्टैंडर्ड में थी तब मेरे पेरेंट्स वृन्दावन जाया करते थे।मेरे पापा कृष्णा जी के बहुत बड़े भक्त थे।और जब आप कृष्णा टेंपल या इस्कान मंदिर जाते हो तो वहां म्यूजिक सबसे इंपॉर्टेंट होता है।और ये काफी ब्यूटीफुल होता है और सभी लोग घुमाते रहते हैं और सिंगिंग करते रहते हैं।मंदिर के भजन बहुत ही खुबसूरत होता था। वहीं पर मेरा म्यूजिक से इंट्रोडक्शन हुआ।मैं वहां बहुत सी लेडिज को साड़ी में देखती थी।वो इसमें बहुत ही प्यारी लगती थी तो मैं अपनी मॉम से कहती थी कि मुझे भी उनकी तरह साड़ी पहनाओ।और फिर ये सब करके मैं हरे रामा हरे कृष्णा गाती थी।ये सब कुछ मेरे साथ नेचुरली हुआ गाना गाना,डांस करना,ढोलक जो मैंने स्पेशली मेरे लिए लिया था उसे प्ले करना सब कुछ नेचुरल था।फिर मैं स्कूल में सिंगिंग वह डांसिंग कम्पीटीशन में परफोर्म करने लगी।फिर मुझे बॉर्डिंग स्कूल भेजा गया और वहां पर भी मैं एक्सट्रा कोरिक्यूलर एक्टिविटीज़ में एक्टिव रहती थी।मैं अपने स्कूल बैंड का हिस्सा थी और मैं बहुत सारे इंस्ट्रूमेंटस बजा लिया करती थी।मैंने रिपब्लिक डे पर अपने स्कुल बैंड के साथ की बार मार्च किया।मैं ड्रम्स बजाना पसंद‌ करती थी। साइड ड्रम्स और बेस ड्रम्स।और मैंने बैंक पाइप बजाना सीखा।और अपने स्कूल डेज में मैं काफी क्यूट ट्युन्स बजाया करती थी।

म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंटस बजाना अपनी स्कूल का बैंड लीडर होना रिपब्लिक डे पर परेड करना और ड्रम्स बजाना।क्या ये सब एक ही साथ शुरू हुए?

मैं स्पोर्टस में भी काफी डिसेंट थी।और क्योंकि मैं एक बॉर्डिंग स्कूल में थी इसलिए मेरे पास स्टडी के के लिए काफी समय होता था।और इसलिए डांस करना,गाना गाना,अपने बोर्डिंग स्कूल में बैंड का लीडर होना,स्पोर्टस वगैरा के लिए काफी समय होता था और आप अपने आप पर कॉन्सेंट्रेट कर सकते थे।मैं औरों की देखती थी और उनसे इन्सपिरेशन लेती थी।और उस समय मैं अलग अलग हाउसेज के बीच कॉम्पीटीशन रियलाइज करती थी। अपने हाउस को लीड करना उसकी क्लाश और फिर कॉम्पीटीशन जीतना सब कुछ।और ये सब मैं पर्सनली लेती थी कि मेरे हाउस को जीतना ही है।फिर मेरी ग्रेजुएशन दिल्ली में शुरू हुई। मैंने फिलोसॉफी में पी जी की। मुझे फिलोसॉफी पढ़ना बहुत अच्छा लगता था।इसके बाद मैंने डांसिंग शुरू की।

उसके बाद मुझे दिल्ली में बहुत ही अच्छे गुरूजी मिले।और मैंने सुबह सिंगिंग शाम को डांसिंग सीखना शुरू किया व बीच का टाइम मै कॉलेज में बिताया करती थी।वहां पर मैने काफी म्यूजिक व सिंगिंग कम्पीटीशन में भाग लिया।



सांगरी टुडे हिंदी न्यूज़ के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और टेलीग्राम पर जुड़ें .
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBEचैनल को विजिट करें